
Raipur NIFT Campus: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) का 20वां कैंपस पुराने विधानसभा भवन में अस्थायी रूप से शुरू हो गया है। 29 जुलाई से तीन दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें पहले बैच के विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। अभी फैशन डिजाइन, फैशन इंटीरियर्स और फैशन एंड लाइफस्टाइल एक्सेसरी डिजाइन जैसे तीन ग्रेजुएशन प्रोग्राम में 80 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। निफ्ट दिल्ली व निफ्ट रायपुर की कैंपस डायरेक्टर डॉ. शिंजु महाजन ने बताया कि नया रायपुर में स्थायी कैंपस बनने में तीन से चार वर्ष लगेंगे। तब तक पुराने विधानसभा भवन को आधुनिक शैक्षणिक परिसर के रूप में विकसित किया गया है।
डायरेक्टर डॉ. महाजन ने बताया कि निफ्ट की पढ़ाई पूरी तरह प्रैक्टिकल बेस्ड होगी। पहले दो वर्षों में विद्यार्थियों की बुनियादी डिजाइन, मटेरियल, पैटर्न मेकिंग और क्रॉफ्ट की समझ विकसित की जाएगी। इसके बाद एआई और डिजिटल डिजाइन टूल्स को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा, ताकि छात्र तकनीक और रचनात्मकता दोनों में दक्ष बन सकें। निफ्ट का क्लस्टर इनिशिएटिव भी विद्यार्थियों के लिए खास रहेगा। इसके तहत छात्र गांवों और कारीगरों के बीच जाकर उनकी कला, जीवनशैली और पारंपरिक शिल्प को समझेंगे। वहीं कारीगरों को भी निफ्ट कैंपस में बुलाकर आधुनिक बाजार, डिजाइन और रंगों की नई मांगों से परिचित कराया जाएगा।
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद 1 नवंबर 2000 को पहला विधानसभा सत्र रायपुर के राजकुमार कॉलेज में हुआ था। इसके बाद विधानसभा विकसित किया गया। करीब 25 वर्षों तक यहीं बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र आयोजित हुए और राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानून और नीतियां बनीं। नए विधानसभा भवन के नवा रायपुर में शुरू होने के बाद इस ऐतिहासिक इमारत को नया उपयोग मिला।
जहां कभी मंत्रियों का रेस्ट हॉउस हुआ करता था, वहां अब स्टूडेंट के लिए हॉस्टल बनाया गया है। मंत्रालय की पुरानी लाइब्रेरी को कंप्यूटर लैब और नई लाइब्रेरी में बदला जा रहा है, जबकि कार्यालयों के कमरों को आधुनिक क्लास रूम में बदला गया है। सामने वाले पूरे ब्लॉक में कक्षाएं संचालित होंगी। सेंटर हॉल में एडिमिशन फॉर्म और एडमिनिस्ट्रेशन का काम चल रहा है। सीएम, विधायक के केबिन में डायरेक्टर और टीचर केबिन बनाया गया है।
निफ्ट का स्थायी कैंपस नवा रायपुर में बनेगा। इसमें करीब 3-4 साल का समय लगेगा। इसकी कुल संभावित लागत करीब 271.18 करोड़ रुपए होगी। इसमें जमीन लेने में 21.18 करोड़, भवन निर्माण के लिए 200 करोड़ और मशीनरी, फर्नीचर के लिए 50 करोड़ रुपए का खर्च होगा।