
Mojo Mushroom Factory: 199 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस मोजो मशरूम फैक्टी के संचालक विमल चेतान के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कर पाई है। इसको लेकर अब पुलिस डिपार्टमेंट और संचालक के बीच सांठगांठ की बातें होने लगी हैं।
दरअसल खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री से 109 बाल मजदूरों का रेस्क्यू किया गया था। महिला बाल विकास विभाग के अनुसार इसमें 14 लड़के और 12 लड़कियां नाबालिग थे। दिल्ली मानवाधिकार आयोग की टीम, महिला बाल विकास विभाग की टीम व पुलिस की टीम ने मिलकर कंपनी में छापा मारा था। इस दौरान 68 बच्चियां और 41 बच्चे काम करते हुए मिले। ये सभी असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, यूपी, एमपी के हैं। कुछ आसपास के गांव से भी थे।
इस मामले में जब खरोरा थाना प्रभारी कृष्णकुमार कुशवाहा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वहां 105 बालिग और 4 नाबालिग मिले थे। उनका परिवार साथ था। जांच में कोई अपराधिक घटना नहीं मिली, हमारे पास सारे सबूत है।
महिला बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारी ने बताया कि वहां 109 बच्चों की काउंसलिंग की। इसमें बच्चों ने बताया कि 3 महीने से लेकर 3 साल तक यहां बंद रखा गया था। वहीं, एक कमरे में 10-15 बच्चों को ठूंस-ठूंस कर रखते थे। उनके साथ मारपीट और लड़कियों से छेड़खानी की बातें भी सामने आई हैं। कुछ बच्चे ऐसे भी मिले हैं जिन्हें पिछली बार इसी कंपनी से छुड़ाया था। उन्होंने पूछताछ में बताया कि इस बार दूसरे ठेकेदार ने काम में लगावाया, लेकिन कम काम बोलकर ज्यादा करवाते हैं।
इस कंपनी का संचालक और ठेकेदार बिना किसी डर के प्रशासन की नाक के नीचे दोबारा यहां नाबालिगों से जबरदस्ती काम करवा रहा था। जबकि कंपनी में नवंबर 2025 में 97 से ज्यादा मजदूरों, जिसमें नाबालिग, महिला समेत अन्य शामिल थे। इनका रेस्क्यू किया गया था। कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पर इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं होने के कारण दोबारा संचालक और ठेकेदार बिना डर के नाबालिगों से फिर काम कराना शुरू किए।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी का कहना है कि, यह काफी संगीन अपराध है। इस मामले में दस से अधिक अलग-अलग धाराओं के तहत अपराध दर्ज होता। जब पता किया था, तो कहते हैं कि जांच की जा रही है। अबतक तो वहां सारे सबूत भी खतम हो गए होंगे। श्रम विभाग भी अपराध दर्ज करा सकता है।
इस मामले में विधिक राय भी ली गई थी, जिसमें अपराधिकता नहीं पाई गई। मेरे समय की घटना नहीं है, मैने इस पूरे मामले का डॉक्यूमेंट मंगाया है, जांच कर अच्छे से बता पाऊंगी। - श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, ग्रामीण एसपी, रायपुर
इस मामले में चाइल्ड लेबर कोर्ट में अभियोजन दायर हुआ है। पहली बार में 20 से 50 हजार रुपए तक का जुर्माना और 6 माह तक जेल का प्रावधान है। फैक्ट्री में दोबारा यह घटना है, तो इससे ज्यादा दंड मिलेगा, कोर्ट ऊपर है। - देवेंद्र देवांगन, जिला अधिकारी, श्रम विभाग, रायपुर
कम से कम 15 बार खरोरा थाना में एफआईआर दर्ज कराने के लिए जा चुके हैं। वहां के प्रभारी द्वारा कह दिया जाता है, कि यह मामला एएसआई देख रहे हैं, वो ही बता पाएंगे। कई बार तो एक ही दिन में दो बार थाना गए तो, एएसआई नहीं थे। कई बार बोलने के बाद भी एफआईआर नहीं की गई, जब बुलाएंगे हमारी टीम थाना जाने को तैयार है। - संजय निराला, संरक्षण अधिकारी, महिला बाल विकास विभाग, रायपुर