
रायपुर@पीलूराम साहू। Nursing Colleges Recognition: छत्तीसगढ़ स्टेट नर्सिंग काउंसिल ने शुक्रवार को 79 नर्सिंग व जीएनएम कॉलेजों की मान्यता की पहली सूची जारी कर दी है। गौर करने वाली बात ये है कि इनमें कई कॉलेजों का एफिलिएशन हैल्थ साइंस विवि ने रोक रखा है। ऐसे में काउंसिल किस आधार पर मान्यता दे रही है, इस पर बड़ा सवाल है। देरी से मान्यता के कारण इस साल काउंसिलिंग में भी देरी हो रही है। छात्र-छात्राओं को काउंसिलिंग का इंतजार है, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग को मान्यता वाली सूची नहीं मिलने में देरी हो रही है।
प्रदेश के जिन नर्सिंग कॉलेजों का एफिलिएशन हैल्थ साइंस विवि ने रोक कर रखा है, उन सभी कॉलेजों की मान्यता का रिनुअल काउंसिल ने कर दिया है। विवि ने उन कॉलेजों का एफिलिएशन रोका है, जो एक या दो वर्षों से इंडियन नर्सिंग काउंसिल नई दिल्ली से सुइटेबिलिटी सर्टिफिकेट नहीं लिया है। पत्रिका के पास आईएनसी की वो सूची है, जिनमें 135 में 79 कॉलेजों ने सितंबर तक सुइटेबिलिटी सर्टिफिकेट नहीं लिया है। यही नहीं ऐसे कॉलेज भी है, जिन्होंने राज्य शासन की अनुमति के बिना अपने नर्सिंग कॉलेज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित कर चुके थे।
तीसरा ऐसे नर्सिंग कॉलेज, जो हाईकोर्ट में गए हैं, जिनका तर्क यह है कि नर्सिंग कॉलेज को संचालित करने के लिए इंडियन नर्सिंग काउंसिल की सुइटेबिलिटी सर्टिफिकेट की आवश्यकता ही नहीं है। बड़ा सवाल है कि जब हैल्थ साइंस विवि एफिलिएिशन रोकता है तो नर्सिंग काउंसिल किस आधार पर इन कॉलेजों की मान्यता रिनुअल कर दिया है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 2024 में सभी 135 निजी नर्सिंग कॉलेजों से बिल्डिंग का सत्यापित नक्शा मंगाया था। ज्यादातर कॉलेजों ने नक्शे ही नहीं भेजे, क्योंकि वे मापदंड के अनुसार नहीं चल रहे हैं। इस पर भी नर्सिंग कॉलेजों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। दरअसल प्रदेश में 25 से 30 फीसदी निजी कॉलेज मापदंड के विपरीत चल रहे हैं। कई स्थानों पर एक से दो कमरों पर किराए के भवन में कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। जबकि इंडियन नर्सिंग काउंसिल आईएनसी के अनुसार बिल्डिंग 23000 वर्गफीट एरिया में बनी होनी चाहिए।
मापदंड के विपरीत निजी नर्सिंग कॉलेजों का संचालन लंबे समय से किया जा रहा है। इसके बावजूद हर साल इन कॉलेजों को मान्यता मिल जाती है। जानकार भी छात्रों को मापदंड अनुसार कॉलेजों में एडमिशन की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि मान्यता रद्द होने पर छात्रों का ही नुकसान होगा।
पं. दीनदयाल उपाध्याय हैल्थ साइंस एंड आयुष विवि ने 7 सितंबर प्रदेश के 36 निजी नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस जारी किया था। नोटिस हाईकोर्ट के अधिवक्ता के लीगल नोटिस के बाद जारी किया गया है। विवि ने कॉलेजों को बताई गई कमियों पर तथ्यात्मक जानकारी देने कहा था। विवि के रजिस्ट्रार डॉ. दिनेश सिन्हा द्वारा जारी नोटिस के अनुसार अजय कुमार त्रिपाठी ने अधिवक्ता शालिनी कश्यप के माध्यम से कॉलेजों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिए लीगल नोटिस दिया है। इसमें जरूरी कमियां व शिकायतें हैं।