
Railway News: रेलवे स्टेशन में माता-पिता के सामने जवान बेटे की ट्रेन की चपेट में आने से दुखद मौत हो गई। लेकिन, रेलवे ने उल्टे मृतक की गलती मानकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग रायपुर ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए मृतक के परिजनों को 45 दिन के भीतर 6 फीसदी ब्याज दर के साथ 12 लाख रुपए देने का आदेश किया है। साथ ही कहा कि मृतक के पास तमाम साक्ष्य मिले थे। मृतक के परिजनों ने नियमानुसार मुआवजा मांगा था। नहीं देने पर जिला फोरम में परिवाद पेश किया।
मंदिर हसौद निवासी संतराम भट्ट पत्नी बिरस और बेटे मिथुन के ससुराल जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कापन आए थे। 2 जुलाई 2023 को यहां से तिल्दा-नेवरा जाने के लिए कापन स्टेशन पर टिकट लेकर बेटा मिथुन पटरी पार कर रहा था। इसी दौरान ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। घटना के बाद उसके माता-पिता और पत्नी प्रमिला भट्ट ने रेलवे प्रशासन से मुआवजा देने की अपील की। जिसे रेलवे ने नकार दिया था। इस पर उन्होने जिला फोरम में दस्तावेजी साक्ष्य के साथ परिवाद दायर किया। आयोग अध्यक्ष डाकेश्वर प्रसाद शर्मा सदस्य निरूपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री ने माना कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर को हर्जाना देना होगा।
रेलवे ने परिजनों के दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मृतक ने नियमों का पालन नहीं किया। पटरी पार करना लापरवाही की श्रेणी में आता है। कापन रेलवे स्टेशन में ओवरब्रिज और फुट ओवरब्रिज नहीं होने के कारण लेवल क्रॉसिंग गेट (एलसी गेट) बनाया गया है। इसका उपयोग करना था। इस पर परिजनों ने आयोग को बताया कि ट्रेन के आगमन की सूचना देने के लिए स्टेशन में कोई नहीं था। साथ ही ओवरब्रिज और फुट ओवरब्रिज नहीं होने के कारण उनका बेटा पटरी पार कर स्टेशन के दूसरे तरफ बनाए गए टिकट घर से टिकट लेकर लौट रहा था।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने माना कि रेलवे ने स्वयं ही स्वीकार किया है कि वहां ओवर और फुट ओवर ब्रिज नहीं था। उक्त स्थिति में यात्रा करने के लिए टिकट लेने सभी को पटरी पार करके ही जाना पड़ता था। मृतक के पास से टिकट भी मिला था। इससे साबित होता है कि रेलवे की लापरवाही थी।