
Regular Recruitment: एम्स, आंबेडकर व डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों को रखने से नियमित भर्ती पर ब्रेक लग गया है। आउटसोर्सिंग पर सफाई-सुरक्षा आम बात है, लेकिन नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ को रखने से विभिन्न पदों पर भर्ती का दरवाजा बंद हो गया है। आउटसोर्सिंग में वेंडर को फायदा होता है। वे निर्धारित वेतन पर भी कटौती करते हैं।
ऐसा आरोप आंबेडकर व अन्य अस्पतालों में कर्मचारियों ने लगाए हैं। नियमित भर्ती से स्थायी कर्मचारी मिलते हैं। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन इस ओर उदासीन है। एम्स, डीकेएस व आंबेडकर अस्पताल में आउटसोर्सिंग भर्ती का ऐसा मकड़जाल फैला है कि नियमित भर्ती सालों से बंद है।
पिछले साल मार्च में आंबेडकर अस्पताल के ठेका कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर नई भर्ती का विरोध किया। दरअसल यहां सिक्योरिटी व हाउस कीपिंग के अलावा ज्यादातर कंप्यूटर ऑपरेटर आउटसोर्स वाले हैं। अस्पताल प्रबंधन ने कुछ कर्मचारियों को दैनिक वेतनभोगी के बतौर भी रखा था।
कर्मचारी इसी बात का विरोध कर रहे थे। कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें रेगुलर भर्ती में मौका नहीं दिया जा रहा है। इससे उनकी उम्र भी निकलती जा रही है। उनका आरोप है कि दैनिक वेतनभोगी श्रेणी के लिए जिन कर्मचारियों का चयन किया गया है, उन्हें अस्पताल में काम करते हुए छह महीने भी नहीं हुए हैं, जबकि यहां कई कर्मचारी सालों से सेवाएं दे रहे हैं।
आंबेडकर अस्पताल में 200 से ज्यादा ठेका कर्मचारी है, जो लंबे समय से काम कर रहे हैं। ये वेंडर के अंडर में काम कर रहे हैं। कई बार वेतन में जबरदस्ती कटौती भी की जाती है, जिससे उनमें नाराजगी है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को ठेका कर्मचारियों से ज्यादा वेतन (कलेक्टर दर) मिलता है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सिक्योरिटी व हाउस कीपिंग ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में ठेके पर चल रहे हैं।
कर्मचारियों को वेंडर तय वेतन भी दे रहा है। शिकायत मिलने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। अस्पताल में अपने चहेतों को डेली विजेस नौकरी में रखने का भी आरोप लगता रहा है। डीकेएस में भी सिक्योरिटी व हाउस कीपिंग के अलावा अन्य विभागों में 100 से ज्यादा कर्मचारी ठेके पर है।
Regular Recruitment: एम्स में 700 के करीब आउटसोर्सिंग के कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इनमें डायरेक्टर कार्यालय भी शामिल है। जनवरी 2024 में इन कर्मचारियों ने सेवा समाप्त किए जाने की आशंका में हड़ताल भी की थी। तब एम्स का कामकाज पूरी तरह चरमरा गया था। नियमित भर्ती नहीं करने के आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म हुई थी।
2012 में शुरू एम्स में हाउस कीपिंग व सिक्योरिटी के अलावा फायर ब्रिगेड सर्विस आउटसोर्सिंग पर चल रही है। ठेका में काम कर रहे इन कर्मचारियों को 13 साल से ज्यादा हो चुके हैं। स्वाभाविक है अगर नियमित भर्ती होती है तो वे उम्रदराज के चलते बाहर हो जाएंगे। हड़ताल के दौरान भी ये मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।