
Saurabh Chandrakar Fake Passport: महादेव सट्टा ऐप का संचालक सौरभ चन्द्राकर अंग्रेजी के एच अक्षर में हेराफेरी कर इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में एंट्री करते पकड़ा गया। उसके पास बरामद पासपोर्ट में फोटो और नाम के साथ ही जन्मतिथियों में अलग-अलग जानकारियां मिली है। बताया जाता है कि उसके इंडोनेशियाई पासपोर्ट में फोटो सौरभ चन्द्राकर की तस्वीर लगी थी। लेकिन उसमें श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस (Ajantha Mendis) के स्थान पर एच अक्षर हटाकर (Ajanta Mendis) किया गया है, इसमें (सौरभ की फोटो वाले) 21 जून 2024 को जारी किया गया पासपोर्ट क्रमांक E3387986 21 जून 2034 तक 10 साल के लिए वैलिड दिखाया गया है।
साथ ही जन्म स्थान 11 मार्च 1998 को दक्षिण-पूर्व एशियाई नागरिक बताया गया है, जबकि सौरभ और रवि उप्पल का जन्म भारत में हुआ और ईडी की छापेमारी के बाद दोनों दुबई फरार हो गए थे। भारतीय पासपोर्ट से विदेश जाने के बाद गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण से बचने के लिए वानूआतू की नागरिकता ली थी। जिसमें सौरभ द्वारा जन्मतिथि 13 जनवरी 1995 बताया गया था। वहीं इंडोनेशियाई के फर्जी पासपोर्ट 1998 बताया गया है। उक्त फर्जीवाडे़ के पकडे़ जाने के बाद ओमान पुलिस सौरभ से पूछताछ कर रही है। बता दें कि सौरभ चंद्राकर को 2023 में स्थानीय कोर्ट और ईडी द्वारा फरार घोषित किया गया है। वहीं इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर के नाम से मिलती-जुलती पहचान क्यों चुनी, इसके संबंध में जांच की जा रही है। लेकिन, आशंका जताई जा रही है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए और खुद को विदेशी नागरिक बताने के लिए यह किया गया है। इसका आवेदन करने, फर्जी दस्तावेज बनाने वाले और इसके पीछे काम कर रहे रैकेट की तलाश की जा रही है। बता दें कि पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। केवल उनके नाम से मिलता-जुलता नाम कथित तौर पर फर्जी पहचान के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
फर्जी पासपोर्ट का मामला सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की प्रक्रिया में विलंब हो सकता है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि ओमान के कानून के अनुसार पहले वहां फर्जी पासपोर्ट से जुड़े मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद स्थानीय कोर्ट ही भारत के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर फैसला लिया जा सकेगा।