
World Heart Day: छत्तीसगढ़ के रायपुर के जेन जी लगातार देर रात तक जागने की आदत डाल रहे हैं। मोबाइल गेम्स, वेब सीरीज और सोशल मीडिया के चलते कई युवा रात तीन-चार बजे तक जगते रहते हैं। यह सिर्फ नींद की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है।
हृदय के रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मित श्रीवास्तव, बताते हैं, हमारा शरीर सूर्य की रोशनी और दिन-रात की प्राकृतिक साइकिल के अनुसार चलता है। हार्मोन जैसे इंसुलिन और कॉर्टिसोल, शरीर की ऊर्जा और रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं। यदि युवा देर रात तक जागते हैं और सुबह देर से उठते हैं, तो यह जैविक संतुलन बिगड़ जाता है।
डॉ. श्रीवास्तव आगे बताते हैं कि ग्रंथों में सुबह चार से सात बजे का समय स्वास्थ्य के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इस दौरान शरीर की शारीरिक क्रियाएं जैसे मल विसर्जन, मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा का संतुलन बेहतर होता है। लगातार रतजगा करने से यह प्राकृतिक चक्र बिगड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल और दिल की धड़कन प्रभावित होती हैं। यह बदलाव न केवल मानसिक थकान और तनाव बढ़ाता है, बल्कि हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है।