
Chhattisgarh Renewable Energy @दिनेश कुमार: छत्तीसगढ़ के रायपुर कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम करने के लिए छत्तीसगढ़ में अब अक्षय ऊर्जा के विकल्पों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा को इसका प्रमुख विकल्प माना जा रहा है। इसके लिए छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी ने अलग से सोलर एनर्जी शाखा बनाई है। वर्तमान में प्रदेश में सौर ऊर्जा और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों से करीब 2100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।
उपभोक्ताओं के घरों की छतों पर लगाए गए सोलर प्लांट से करीब 350 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। वहीं औद्योगिक इकाइयों में ओपन एक्सेस के तहत करीब 1250 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट संचालित हैं। अक्षय ऊर्जा दिवस के मौके पर प्रदेश में चल रही इन परियोजनाओं से साफ है कि बिजली के क्षेत्र में सौर और अन्य ग्रीन एनर्जी का योगदान लगातार बढ़ रहा है।
प्रदेश में पिछले दो वर्षों के दौरान अक्षय ऊर्जा से बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सोलर एनर्जी और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों से करीब 1200 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन बढ़ा है। आने वाले समय में नए प्रोजेक्ट शुरू होने के साथ इस क्षमता में और इजाफा होने की उम्मीद है।
किसानों को सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराने के लिए पीएम कुसुम योजना पर भी काम किया जा रहा है। योजना के तहत वर्तमान में करीब 21 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में बिजली की जरूरतों को सौर ऊर्जा के जरिए पूरा करना और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करना है।
कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए नई योजना शुरू की जा रही है। इसके तहत प्रदेश के कृषि फीडरों में करीब 308 मेगावाट क्षमता के सोलर संयंत्र लगाए जाएंगे। इससे कृषि क्षेत्र को दिन के समय सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
पीएम सूर्य घर बिजली योजना के तहत भी प्रदेश में तेजी से सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। सोलर एनर्जी शाखा के अनुसार, 19 अगस्त तक करीब 92 हजार घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इनसे लगभग 350 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। वहीं करीब 90 हजार सोलर प्लांट के कनेक्शन मंजूर किए जा चुके हैं। योजना के तहत पात्र परिवारों को सौर ऊर्जा अपनाने के साथ बिजली बिल में राहत मिलेगी। योजना के प्रावधानों के अनुसार परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल सकता है।
राजनांदगांव में सौर ऊर्जा के साथ बैट्री एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) आधारित बड़ा प्लांट संचालित हो रहा है। इसकी क्षमता करीब 100 मेगावाट है, जिसमें वर्तमान में लगभग 40 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है।
इस परियोजना का खास पहलू यह है कि सौर ऊर्जा से दिन में बनने वाली बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय उपयोग किया जा सकता है। इससे उन उपभोक्ताओं तक रात के समय भी बिजली पहुंचाने में मदद मिल रही है, जहां दिन में सोलर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध होती है।
प्रदेश में अलग-अलग अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन में कई परियोजनाओं की भूमिका है। इनमें घरेलू रूफटॉप सोलर, औद्योगिक ओपन एक्सेस प्लांट, कुसुम योजना, हाइडल और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोत शामिल हैं।
अक्षय ऊर्जा से अतिरिक्त बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में कई योजनाएं संचालित हैं। इनमें किसानों के लिए पीएम कुसुम योजना और घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए पीएम सूर्य घर योजना प्रमुख हैं।
सोलर एनर्जी शाखा के अधीक्षण यंत्री एन. बिम्बसार के अनुसार, प्रदेश में सोलर और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों से करीब 2100 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। आने वाले समय में नई परियोजनाओं और कृषि फीडरों पर सोलर संयंत्रों के जरिए अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी और बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।