रायपुर

Raipur News: थाईलैंड वियतनाम से आए हजारों विदेशी पक्षी, ठिकाना बना खारुन तट का ठाकुराइन टोला, दिखा प्रकृति का अनोखा नजारा

Foreign Birds: खारुन नदी का तट इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां हजारों की संख्या में विदेशी और प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाल रखा है।

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Jun 08, 2026
Raipur News
विदेशी पक्षियों का नया ठिकाना बना खारुन तट (Photo Patrika)

Raipur News: रायपुर में मानसून की दस्तक से पहले रायपुर के समीप खारुन नदी के तट पर स्थित पाटन क्षेत्र का 'ठकुराइन टोला' गांव एक अनोखी प्राकृतिक हलचल का केंद्र बन गया है। हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर आए प्रवासी 'एशियन ओपनबिल स्टॉर्क' पक्षियों ने इस गांव को अपना अस्थायी आशियाना बना लिया है। मई-जून के महीने में इन मेहमानों का पहुंचना अब गांव की पहचान और मानसून के आगमन का शुभ संकेत बन चुका है। ये पक्षी केवल ठहरने के लिए नहीं, बल्कि प्रजनन के लिए ठकुराइन टोला को चुनते हैं।

Raipur News: पांच से छह महीनों के लिए बनाया ठिकाना

गांव के पेड़ों पर स्थित घोंसलों में ये अंडे देते हैं और अगले पांच से छह महीनों तक अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ओपनबिल स्टॉर्क को वंश वृद्धि के लिए जल स्रोतों, सुरक्षित ऊंचे पेड़ों और भोजन की प्रचुरता की आवश्यकता होती है। खारुन नदी का किनारा इन सभी जरूरतों को बखूबी पूरा करता है। बरसात के दौरान नदी और आसपास के जलग्रस्त इलाकों में मिलने वाले घोंघे और अन्य जलीय जीव इनके लिए मुख्य आहार बनते हैं।

जब पेड़ों पर खिलते हैं 'सफेद फूल

इस पक्षी कॉलोनी का सबसे मनमोहक दृश्य वह होता है जब दर्जनों घोंसलों से लदे पेड़ों पर सैकड़ों सफेद पक्षी एक साथ बैठते हैं। दूर से देखने पर ऐसा आभास होता है मानो किसी पेड़ पर दूधिया सफेद फूल खिले हों। यह नज़ारा फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी आकर्षण से कम नहीं है। ग्रामीणों के लिए भी ये पक्षी मेहमान नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा हैं। वे इन पक्षियों के संरक्षण में सक्रिय रहते हैं, क्योंकि इनका आगमन गांव की समृद्धि और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

पर्यावरण का बायो-इंडिकेटर

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, प्रवासी पक्षियों की यह उपस्थिति एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है। यदि क्षेत्र का पर्यावरण प्रदूषित हो या जल स्रोत सूख जाएं, तो ये पक्षी अपना ठिकाना बदल लेते हैं। ठकुराइन टोला का सालों से इनका पसंदीदा स्थल बने रहना, इस क्षेत्र के बेहतर पर्यावरणीय स्वास्थ्य को दर्शाता है।

पर्यटन की अपार संभावनाएं

इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों की मौजूदगी के बावजूद, ठकुराइन टोला अभी तक राज्य के प्रमुख 'बर्ड-वॉचिंग' पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान नहीं बना पाया है। महासमुंद के लचकेरा गांव की तर्ज पर यदि यहां भी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं और संरक्षण के ठोस उपाय किए जाएं, तो यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ा ईको-टूरिज्म हब साबित हो सकता है। यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि प्रकृति संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता भी पैदा करेगा।

स्थान: ठकुराइन टोला (पाटन), दुर्ग
दूरी: रायपुर से करीब 25 किमी
प्रवासी प्रजाति: एशियन ओपनबिल स्टॉर्क
श्रीलंका, बांग्लादेशम थाईलैंड वियतनाम
आगमन काल: मई-जून (मानसून-पूर्व)
ठहराव: अक्टूबर-नवंबर तक

Updated on:
08 Jun 2026 12:57 pm
Published on:
08 Jun 2026 12:55 pm