रायसेन

उच्च शिक्षा हासिल कर नौकरी की बजाय अपनाई किसानी, खेती को फायदे का सौदा बना दिया

New era Farming देश-दुनिया की नवीनतम तकनीकी को अपना रहे खेती के लिए आधा दर्जन बार विदेश जाकर प्रशिक्षण ले चुके हैं

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उच्च शिक्षा हासिल कर नौकरी की बजाय अपनाई किसानी, खेती को फायदे का सौदा बना दिया

बरेली. उच्च शिक्षा (Higher Education) हासिल करने के बाद जितेंद्र सिंह ठाकुर (Jitendra Singh Thakur) के पास भी नौकरी करने के तमाम आॅफर थे लेकिन उन्होंने किसानी में करियर (Career in farming) बनाना तय किया। जितेंद्र ने किसानी के लिए तकनीकी का प्रयोग करते हुए इस क्षेत्र में सफलता के पायदान में चढ़ने लगे। आज की तारीख में आलम यह है कि जितेंद्र सिंह ठाकुर खेती से लाखों कमा रहे साथ ही उनकी वजह से सैकड़ों लोग रोजगार भी पा रहे हैं।

ग्राम हरसिली के भगवत सिंह ठाकुर के पुत्र जितेंद्र सिंह ठाकुर अपने प्रयोगों की वजह से रिकार्ड पैदावार में सफल रहते हैं। सब्जी उत्पादन (Vegetable farming) में अखिल भारतीय व प्रदेश स्तर पर कई पुरस्कार पा चुके जितेंद्र सरकारी मदद से आधा दर्जन बार विदेश जाकर प्रशिक्षण भी समय समय पर प्राप्त करते रहे हैं।
ठाकुर ने 26 एकड़ में बांस, 10 एकड़ में अमरुद, 15 एकड़ में संतरा और 20 एकड़ में टमाटर लगाया है। वह बताते हैं कि खेतों के बीच आवास होने के कारण परिवार के सभी सदस्य खेतों पर नजर रखता है। उन्होंने 2018 में 6 एकड़ जमीन में टुंडला और बालकुआ प्रजाति के बांस लगाने की शुरुआत की थी। बांस रोपण के सकारात्मक परिणाम मिले। इससे उत्साहित होकर उन्होंने जुलाई 2019 में बांस के रकबा में 20 एकड़ का इजाफा कर 26 एकड़ कर लिया था।

ठाकुर लॉकडाउन में मिले समय का पूरा उपयोग बांस के पेड़ों को संभालने में कर रहे हैं। इस समय फसल बहुत ही अच्छी है। बांस के खेती में 5वें वर्ष से निरन्तर 50 वर्ष तक प्रति एकड़ डेढ़ लाख से दो लाख रुपए तक लाभ होगा। इसी तरह 10 एकड़ में लगे जैविक अमरुद से प्रति एकड़ 2 लाख से अधिक लाभी की उम्मीद है। 20 एकड़ में लगे टमाटर की 4 प्रजाती से अच्छा उत्पादन मिल रहा है। तीन एकड़ जमीन में मिर्च, 2 एकड़ में बैंगन भी लगाया है।

by: Anil Verma

Published on:
04 May 2020 02:02 pm
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