
(रिपोर्ट- लक्ष्मीनारायण यादव, ब्यावरा)
Teak Mafia threatens Forest Officials- मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सागौन तस्करी अब सिर्फ जंगलों से लकड़ी चोरी करने का मामला नहीं रह गई है। यह धीरे-धीरे संगठित अपराध का रूप लेती जा रही है। तस्करों के बढ़ते हौसले और वन विभाग के सीमित संसाधन इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। मंगलवार रात सुठालिया क्षेत्र में हुई घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कम संसाधनों और कम स्टाफ के भरोसे वन विभाग कब तक हथियारबंद तस्करों का मुकाबला करता रहेगा।
मंगलवार रात करीब 9.30 बजे वन विभाग की गश्ती टीम सुठालिया क्षेत्र के कच्चे रास्तों पर निगरानी कर रही थी। इसी दौरान नरी की ओर से बाइक पर सागौन की लकड़ी ले जाते कुछ संदिग्ध दिखाई दिए। वन अमले ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो मामला अचानक तनावपूर्ण हो गया। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और करीब दो घंटे तक घटनास्थल पर तनाव बना रहा। वन विभाग की टीम में डिप्टी रेंजर दिनेश नागर, रेंजर अर्जुन शर्मा, वन रक्षक दिलीप नागर, शिवप्रसाद दांगी और जितेंद्र सौंधिया शामिल थे। दूसरी ओर करीब 15 से 16 तस्कर मौजूद थे। संख्या में कम होने के बावजूद वनकर्मी मौके पर डटे रहे और सागौन की लकड़ी वापस ले जाने नहीं दी।
तस्करों ने छोड़ी लकड़ी, लेकिन नहीं टूटा वन अमले का हौसला
वन विभाग के अनुसार जब टीम ने संदिग्धों को रोकने की कोशिश की तो तस्करों ने पहले धमकी दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस होती रही। वनकर्मियों का कहना है कि तस्कर लगातार उन्हें वहां से चले जाने के लिए कहते रहे, लेकिन अमला पीछे नहीं हटा। स्थिति तब और बिगड़ गई जब तस्करों ने पथराव शुरू कर दिया। आसपास खेत होने के कारण उन्हें तुरंत पत्थर नहीं मिले। बताया जाता है कि कुछ तस्कर करीब सौ मीटर पीछे गए और वहां से पत्थर लाकर फिर लौटे। इसके बाद वन विभाग के वाहन को निशाना बनाया गया। पिकअप वाहन के टायर कुल्हाड़ी से काट दिए गए। वाहन का कांच फोड़ा गया और बोनट को भी नुकसान पहुंचाया गया। घटना में तीन वन कर्मियों को भी मामूली चोटें आई है। हालांकि लगातार दबाव के बावजूद वनकर्मी डटे रहे। इसी दौरान आसपास के कुछ ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। हालात बदलते देख तस्करों ने बाइक पर बंधी सागौन की सिल्लियों की रस्सियां काटीं और लकड़ी छोड़कर भाग निकले। वे नरी, हरिपुरा और परधानी कुंडल की दिशा में फरार हो गए।
आधे घंटे पहले दी सूचना, आखिर में पहुंची पुलिस
घटना के दौरान वन विभाग ने पुलिस को भी सूचना दी थी। लेकिन पुलिस टीम मौके पर तब पहुंची, जब काफी देर तक संघर्ष चल चुका था। तब तक अधिकांश तस्कर भाग चुके थे। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि तस्करों का आत्मविश्वास इस वजह से भी बढ़ा है क्योंकि कई मामलों में वे गिरफ्त से बच निकलते हैं। इस घटना में एक ओर 16 लोगों का गिरोह था, जबकि दूसरी ओर केवल पांच वनकर्मी। इसके बावजूद टीम ने तस्करों को सागौन की लकड़ी ले जाने नहीं दी। यही वजह रही कि तस्करों को माल छोड़कर भागना पड़ा।
स्टाफ और संसाधनों की कमी बनी बड़ी चुनौती
वन विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या स्टाफ और संसाधनों की कमी है। स्थिति ये है कि तस्करों के गढ़ सुठालिया क्षेत्र संभालने के लिए केवल एक वनकर्मी है। ऐसे में अब अलग-अलग बीट के कर्मियों की यहां गश्त के दौरान ड्यूटी लगाई जाती है। जंगलों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही टीमों को कई बार कम संख्या में ही गश्त करनी पड़ती है। दूसरी ओर तस्कर समूह में और पूरी तैयारी के साथ निकलते हैं। ऐसे में जोखिम लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को वन विभाग की शिकायत पर सुठालिया पुलिस थाने में बीएनएस की धारा 132, 121 (1), 221, 126(2), 324, 125 के तहत अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच में लिया है। घटना के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर है।
राजगढ़ डीएफओ बैनीप्रसाद दोतानिया, एसडीओ गौरव गुप्ता सहित अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर तस्करों के नेटवर्क और उनके सहयोगियों की भी जांच करने की बात कही है। एसडीओ गुप्ता ने बताया कि तस्करों की जानकारी जुटा रहे है। सायबर टीम की मदद ली है, संबंधित क्षेत्र में तत्कालीन समय में मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर रहे हैं। ताकी तस्करों तक पहुंचा जा सके। जल्द ही योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करेंगे।
घटना की सूचना मिलने पर मैने खुद वन रेंजर को कॉल कर जानकारी ली थी, वे मुझे पहले सूचना नहीं दे पाए थे, वो लोग घबराए हुए थे, हमारी टीम पहुंची तब तक तस्कर भाग गए थे। वनकर्मी की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने, मारपीट, चोट पहुंचाने, हमले की धाराओं में मामला दर्ज किया है। वहीं घटना में घायल तीन वन कर्मियों का मेडिकल कराया है। मामले की जांच कर रहे है।-अनिल राहोरिया, थानाप्रभारी, सुठालिया