CG News: डोंगरगढ़ में शारदीय नवरात्र के समापन पर डोंगरगढ़ की पावन धरती पर एक बार फिर आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भूत संगम देखने को मिला।
CG News: छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में शारदीय नवरात्र के समापन पर डोंगरगढ़ की पावन धरती पर एक बार फिर आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भूत संगम देखने को मिला। बुधवार की देर रात नीचे स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर से 901 प्रज्वलित ज्योति कलशों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा ने हजारों श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
हर वर्ष की तरह इस बार भी सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर ज्योति कलश धारण कर ऽजय माता दीऽ के जयकारों के साथ मंदिर प्रांगण से यात्रा आरंभ की। विशेष बात यह रही कि इस धार्मिक आयोजन के सम्मान में रेलवे ट्रैक पर चलने वाली ट्रेनों के पहिए लगभग डेढ़ घंटे (1.50 मिनट) तक थमे रहे, ताकि माई की ज्योत निर्विघ्न महावीर तालाब तक पहुंच सके।
रात्रि 10 बजे मंदिर परिसर में ट्रस्ट द्वारा मां बम्लेश्वरी की विशेष पूजा-अर्चना के बाद ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल द्वारा प्रथम ज्योति निकालकर शोभायात्रा का शुभारंभ किया गया। इसके बाद श्रद्धालु महिलाएं क्रमवार रूप से मंदिर की सीढ़ियों से उतरते हुए, रेलवे ट्रैक पार कर, महावीर तालाब तक पहुंचीं।
यही वह स्थान है जहां हर साल माँ की ज्योतों का विसर्जन होता है। रात्रि लगभग 2.30 बजे तक चला यह पवित्र आयोजन मानो धरती पर स्वर्ग का दृश्य रच रहा था। ज्योतियों की लौ, तालाब के जल में उनका प्रतिबिंब, और भक्तों के आंखों में उमड़ता भाव, यह सब मिलकर एक अविस्मरणीय क्षण बन गया।
इस आयोजन में केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों की भी सार्थक उपस्थिति रही। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रामजी भारती, पूर्व विधायक विनोद खांडेकर, पालिका अध्यक्ष रमन डोंगरे, ट्रस्ट के अन्य प्रमुख सदस्य जैसे अनिल गट्टानी, महेंद्र भाई पटेल, चंद्रप्रकाश मिश्रा, सहित अनेक नागरिकों व सेवादारों ने आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई।
विधायक हर्षिता स्वामी बघेल हर नवरात्र विसर्जन पर ज्योति कलश उठाती हैं। इस बार यह उनका सातवां मौका था । जिसमें उन्होंने ज्योति कलश उठाई । इस आयोजन की अद्वितीय विशेषता यह रही कि शोभायात्रा मां शीतला मंदिर पहुंची, जहां मां बम्लेश्वरी की ज्योत का मिलन मां शीतला की ज्योत से कराया गया। इस अवसर को देखने के लिए भक्तगण देर रात तक मंदिर परिसर में डटे रहे। यह मिलन केवल दो ज्योत का नहीं, बल्कि डोंगरगढ़ की आत्मा से जुड़ी परंपरा का गवाह बनता है।