
राजसमंद.
'देर आए, दुरस्त आए' की कहावत इसबार मानसून ( monsoon 2019 ) पर फिट होती है। मानसून भले ही देरी से आया हो लेकिन बारिश ने वर्षों के रिकॉर्ड ( heavy rain in rajasthan ) तोड़ दिए। अच्छी बारिश से अगस्त माह के अंतिम दिनों खारी और गोमती ( Gomti River ) दोनों नदियां झील में समाने लगीं, और पांच दिन में झील में करीब ढाई फीट से अधिक पानी ( rain in rajsamand ) आ गया। हालांकि अब गोमती नदी से पानी की आवक धीरे-धीरे घटती जा रही है। सोमवार शाम को गोमती नदी की छापरखेड़ी पुलिया पर महज दो इंच की चादर चल रही थी।
छह से साढ़े आठ फीट पहुंचा झील का जल स्तर ( rajsamand news )
नंदसमंद में पानी की लगातार आवक होने से 29 अगस्त को सुबह छह बजे खारी फीडर खोली गई, जिसका पानी उसी दिन शाम पौने छह बजे राजसमंद झील पहुंच गया। तब से आजतक खारी ( khari river ) में छह फीट पानी चल रहा है। इधर 30 अगस्त को तड़के गोमती नदी का पानी भी झील के दामन में समाने लगा है। पांच दिनों से झील में गोमती और खारी का पानी समाने से झील के जल स्तर में ढाई फीट से अधिक का इजाफा हुआ है।
गौरतलब है कि जब झील में पानी की आवक शुरू हुई थी तब झील का जल स्तर छह फीट से कम था, जबकि सोमवार शाम को झील का जल स्तर 8.6 इंच पहुंच गया। यानि पांच दिनों में झील में करीब ढाई फीट पानी की आवक हुई है। हालांकि चारभुजा क्षेत्र में बारिश नहीं होने से अब गोमती नदी से पानी की आवक कमजोर हो गई है। छापरखेड़ी पुलिया पर पांच इंच चल रही चादर सोमवार को घटकर 2 इंच रह गई।
दो साल बाद आया पानी
2 साल पहले वर्ष 2017 में अच्छी बारिश ने झील को छलका दिया था। इसके बाद वर्ष 2018 में यहां औसत से 134 मिमी बारिश कम हुई, जिससे झील में पानी की आवक नहीं हुई और झील का जलस्तर धीरे-धीरे घटता चला गया।
आज के दिन 2017 में 28.3 फीट था झील का जल स्तर
वर्ष 2017 में जब झील छलकी थी, तब 2 सितम्बर को झील का जल स्तर 28.3 फीट था, और खारी तथा गोमती का पानी वेग के साथ झील में समा रहा था।
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