
रतलाम. पर्युषण महापर्व के दौरान मंगलवार को जैन संत प्रकाशमुनि की निश्रा में संवत्सरी पर्व मनाया गया। मान कषाय और क्रोध से सबसे ज्यादा बैर की गांठ बंधती है, तीसरी गांठ माया से भी बंधती है। संत ने क्षमा के संकल्प के साथ बताया कि संसार में सबसे ज्यादा नुकसान बैर और लोभ सेे ही होता है। इसलिए इनसे सदैव बचने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने क्षमापना पर्व पर मन से क्षमापना करने का आव्हान भी किया।
मोहन टाकीज स्थित सौभाग्य प्रकाश दरबार में 16 सितंबर को श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य प्रकाश मुनि की निश्रा में सुबह साढे सात बजे से सामूहिक क्षमापना का आयोजन होगा। इसके बाद तप आराधकों के लिए सामूहिक पारणा का कार्यक्रम रखा गया है। इसके साथ ही श्री संघ का नवकारसी की आयोजन भी होगा। चातुर्मास समिति ने समाजजनों से उपस्थित रहने का आव्हान किया है।
क्षमा के संकल्प के साथ संवत्सरी का पर्व मना
मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय की निश्रा में मंगलवार को क्षमा के संकल्प के साथ संवत्सरी का पर्व मना। चातुर्मास आयोजन समिति ने अठठाई सहित अन्य कठोर तप करने वाले 50 से अधिक तपस्वियों का बहुमान किया। महासती चंद्रयशा ने 41 उपवास पूर्ण कर 45 उपवास के प्रत्याख्यान लिए।
क्षमा करना ही प्रेम का सृजन है
मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए प्रवर्तकश्री ने कहा कि संवत्सरी का पर्व बैर की गांठ खोलने का संदेश देता है। इस दिन वो सौभाग्यशाली होता है, जो अपने मन में मैत्री के भाव भरता और बैर का विसर्जन कर देता है। मन को शुद्ध करना और मन से क्षमा करना ही प्रेम का सृजन है। शरीर का सुख और मन का सुख किसी काम का नहीं होता, असली सुख बैर के विसर्जन करने में है, जो कभी विसर्जित नहीं होता है।
50 से अधिक तपस्वियों का सम्मान
शुरुआत में प्रवचन प्रभाविका सुमनप्रभा, महासती चंदनबाला एवं महासती स्वर्णाश्री ने संबोधित किया। पारस वोरा ने अध्यक्षीय भाषण दिया। पूर्व श्रीसंघ अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने चातुर्मास की रूपरेखा बताते हुए तपस्वीगण की जानकारी दी। प्रवर्तकश्री ने कई तपस्वियों को तपस्या के प्रत्याख्यान कराए। चातुर्मास आयोजन समिति 50 से अधिक तपस्वियों का सम्मान किया।
प्रवचन प्रभाविका महासती रही मंचासीन
इस दौरान प्रवचन प्रभाविका सुमनप्रभा ठाणा-8, महासती चंदनबाला, महासती कल्पना एवं सेवाभावी दर्शनमुनि मंचासीन रहे। धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, सौभाग्य जैन महिला मंडल, सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।
इन तपस्वियों का हुआ बहुमान
प्रखर अश्विन गंग 31 उपवास, क्रिजंल अभिषेक मेहता 30 उपवास, शिल्वी राकेश छाजेड 16 उपवास, राकेश गांधी, पूजा हेमंत गंग 11 उपवास, विनोद झामर, सरला विनोद झामर 10 उपवास, सुरेश ओरा, अतुल कैलाशचंद्र चौरडिया, जाली राजेन्द्र गादिया, शांताबाई राजमल कुमठ, अर्पिता कटारिया 9 उपवास, नरेन्द्र लालचंद गंग, प्रीति नरेद्र गंग, ऋतु महेन्द्र गंग, दर्शना राहुल चौरडिया, रोहित कमलेश चौरडिया, प्रियांश संजय चौरडिया, दिव्या प्रियांश चौरडिया, अक्षत नीतेश जैन, बाबुलाल मेहता, मनीष प्रकाश गादिया, आयुष सुशील मूणत, टिवकल आयुष मूणत, रेखा अशोक राठोड, माला जैन, अक्षिता राहिल सियाल, अंजू लोकेश मांडोत, शिखा गौरव जैन, क्षीतिज प्रमोद नाहर, इशिता क्षीतीज नाहर, समीक्षा कीर्ति दख, मनीश राजेन्द्र गुगलिया, प्रियंका मनीष गुगलिया, प्रियांशी वीरेंद्र लोढा, मुस्कान महेश कटकानी, पलक कटारिया, वृद्धि दीपक भरगट, अनुष्का अजय पितलिया, रिया पंकज कटकानी, मनवी अरविंद मूणत, डाली राकेश झामर, अमन अजय मूणत, सुनीता राजकुमारी संघवी, कीर्तिष नरेन्द्र नागसेठीया, अरूण मूणत एवं हर्षिता अनिल गांधी सभी 8-8 उपवास सहित अन्य तपस्वी गण।