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शिक्षक ने मेडिकल शिक्षार्थियों के लिए दान की अपनी देह

88 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक शरद चंद्र ने शिक्षक होने के नाते अपना धर्म मृत्यु के बाद भी निभाया और दधीचि की परंपरा को जीवंत करते हुए अपनी देह मेडिकल कॉलेज में स्टूडेंट की शिक्षा के लिए दान दे दी। खास बात यह है कि उनकी देह गणेश चतुर्थी के पावन दिन दी गई।
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रतलाम

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Kamal Singh

Sep 15, 2026

ratlam news

रतलाम. गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर 88 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक शरदचंद्र लक्ष्मण राव कानडे ने अपनी अंतिम इच्छा के अनुरूप अपनी देह मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए समर्पित कर समाज में त्याग का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी धर्मपत्नी निर्मला कानडे एवं परिवार की सहमति से यह देहदान किया गया। देहदान के लिए गणेश चतुर्थी जैसा पावन दिन भी उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए आया। गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले उन्होंने देह त्यागी और गणेश चतुर्थी को मेडिकल कॉलेज को उनकी देह सुपुर्द की गई।

7 दिसंबर 1937 को उज्जैन में जन्मे कानेड़े ने रतलाम शिक्षा विभाग में सेवाएं दीं। राष्ट्रप्रेम की भावना से उन्होंने भारत-चीन और भारत-पाक युद्ध के समय घर-घर जाकर सेना के लिए सहयोग राशि एकत्र कर सीमा तक पहुंचाई थी।

15 साल पहले ही तय कर लिया था

कानड़े ने करीब 15 साल पहले तय कर लिया था कि वे मेडिकल रिसर्च के लिए देहदान करेंगे। जब रतलाम में मेडिकल कॉलेज नहीं था, तब उन्होंने इंदौर में देहदान का संकल्प पत्र भरा था। बाद में रतलाम मेडिकल कॉलेज खुलने पर समाजसेवी गोविंद काकानी के माध्यम से रतलाम मेडिकल कॉलेज में अपना देहदान पंजीकृत कराया।

घर पर दिया गार्ड ऑफ ऑनर

रविवार शाम 4 बजे निजी अस्पताल में उनके निधन की सूचना पर डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनिता मूथा को सूचना दी गई। सोमवार की सुबह शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने उनके सनसिटी स्थित निवास पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद अंतिम यात्रा मेडिकल कॉलेज पहुंची। सुबह 11 बजे प्रभारी डीन डॉ. जेसी हुंडेकर, एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंगरौले सहित स्टाफ की मौजूदगी में देह को अध्ययन के लिए अभिरक्षा में लिया गया। इस अवसर पर समन्वय परिवार, प्रभु प्रेमी संघ, काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन सहित कई संगठनों ने गायत्री मंत्र के साथ पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

उनकी बड़ी पुत्री श्रद्धा सरवटे शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, सीहोर में सेवाएं दे चुकी हैं। पुत्र धनंजय कानडे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सरोकारों से जुड़े हैं। छोटी पुत्री डॉ. अनामिका सारस्वत शासकीय कन्या महाविद्यालय, रतलाम में अर्थशास्त्र की प्राध्यापक हैं। दामाद गिरीश सारस्वत सैलाना के सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्य हैं। पुत्रवधू प्रोफेसर अनुभाकानडे शासकीय महाविद्यालय, सैलाना में रसायन शास्त्र की प्राध्यापक हैं। बड़े दामाद विद्युत मंडल उज्जैन से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके पोते-पोतियां एवं नातिन भी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

शोकसभा को संबोधित करते हुए समन्वय परिवार के सदस्य गोविंद काकानी ने बताया कि कानड़े ने हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर में प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी से दीक्षा ली थी तथा अनेक वर्षों तक वहां सेवाएं प्रदान कीं।