रंगों का महापर्व होली आगामी 9 व 10 मार्च को मनाई जाएगी। 9 मार्च को होली का दहन होगा तो 10 मार्च को रंगपर्व का उत्सव रहेगा। इस बार होली में विशेष संयोग उत्तरफाग्लुनी नक्षत्र में त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। यह योग होली के महत्व को बढ़ाएगा।
रतलाम। रंगों का महापर्व होली आगामी 9 व 10 मार्च को मनाई जाएगी। 9 मार्च को होली का दहन होगा तो 10 मार्च को रंगपर्व का उत्सव रहेगा। इस बार होली में विशेष संयोग उत्तरफाग्लुनी नक्षत्र में त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। यह योग होली के महत्व को बढ़ाएगा। होलिका दहन के लिए इस बार सिर्फ 2 घ्ंाटे 25 मिनट का मुहूर्त बन रहा है। इसके अलावा निशाकॉल में पूजन आदि के कर्म होंगे। राशि अनुसार दहन में सामग्री के दान से विशेष शुभ फल मिलेंगे।
ज्योतिषी वीरेंद्र रावल ने बताया कि 9 मार्च को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में सोमवार को प्रदोषकाल से लेकर निशाकाल तक होलिका दहन किया जाता है। इस बार जो योग बन रहा है यह व्यक्ति सहित शहर के साथ साथ राज्य व देश में सुख-शांति, समृद्धि के अलावा संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी पूरी करेगा।
राशि अनुसार करें होलिका की पूजन
- मेष और वृश्चिक राशि के लोग गुड़ की आहुति दें।
- वृष राशि वाले चीनी की आहुति दें।
- मिथुन और कन्या राशि के लोग कपूर की आहुति दें।
- कर्क के लोग लोबान की आहुति दें।
- सिंह राशि के लोग गुड़ की आहुति दें।
- तुला राशि वाले कपूर की आहुति दें।
- धनु और मीन के लोग जौ और चना की आहुति दें।
- मकर व कुंभ वाले तिल को होलिका दहन में डालें।
होलिका भस्म का होता है खास महत्व
ज्योतिषी रावल के अनुसार होलिका दहन की भस्म को काफी पवित्र माना गया है। इस आग में गेहूं, चना की नई बाली, गन्ना को भुनने से शुभता का वरदान मिलता है। होली के दिन संध्या बेला में इसका टीका लगाने से सुख-समृद्धि और आयु में वृद्धि होती है। इस दिन नई फसल और खुशहाली की कामना भी की जाती है। इस दिन होलिका की आग में सेंक कर लाए गए धान्यों को खाने से शरीर निरोगी रहती है व घर में माता अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है।
यह रहेगा होलिका का मुहूर्त
होलिका दहन मुहूर्त - शाम 6 बजकर 26 मिनट से रात 8 बजकर 52 मिनट तक।
दहन की कुल अवधि - 2 घंटे 25 मिनट तक।
भद्रा पुंछा - सुबह 9 बजकर 50 से सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक।
भद्रा मुखा - सुबह 10 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक।