
रतलाम। यात्री सुविधा बढे़, स्वच्छता के प्रति यात्री जागृत रहे व मेरा कर्मचारी इस तरह का काम करे की उसकी प्रतिष्ठा सामाजिक रूप से बढे़, ये मेरा लक्ष्य रहेगा। किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो यात्री हो या कर्मचारी, मुझसे मिलने आ सकता है। मैं किसी को बगैर मिले नहीं जाने दूंगा, क्योंकि यहां तक वही व्यक्ति आएगा जो परेशान हो। ये कहना है मंडल के नए रेल प्रबंधक आरएन सुनकर का। पत्रिका से बात में डीआरएम ने कहा की वे दो यात्री ट्रेन का परीक्षण करवा रहे है, जो इंदौर से रतलाम तक बढ़ाया जा सके। इससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
ट्रेन विस्तार पर परीक्षण
डीआरएम ने कहा की इस समय साप्ताहिक रूप से इंदौर-जबलपुर-इंदौर व इंदौर-रीवा-इंदौर साप्ताहिक ट्रेन चलती है। इस बारे में निर्देश दिए जा रहे है कि इनका परीक्षण यात्री सुविधा व वर्तमान आय के साथ किया जाए। संभव हुआ तो इन ट्रेन को इंदौर से रतलाम तक बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए वातानुकूलित अतिरिक्त यात्री प्रतिक्षालय बनाने का निर्णय लिया है।
बायोमेट्रीक से अनुशासन
बायोमेट्रीक मशीन को कार्यालयों में अगले माह से लगाया जाएगा। इससे अनुशासन बढेग़ा, ये ठीक है, लेकिन एक सुत्र वाक्य में भरोसा है कि आज का कार्य कल के लिए मत टालो। आमतौर पर कहा जाता है कि रेलवे का कर्मचारी तनाव में रहता है। इस बात को जानने की जरुरत है कि तनाव हुआ ही क्यों। अगर कर्मचारी को पर्याप्त संसाधन देंगे, वो प्रसन्नता के साथ काम करेगा।
सामाजिक व परिवार में प्रतिष्ठा
कर्मचारी का सामाजिक व परिवार में प्रतिष्ठा बढे़, इसके लिए मेरी तरफ से कमी नहीं रहेगी, लेकिन ये कर्मचारी की भी जवाबदेही है कि वो काम के समय सिर्फ काम करे। बायोमेट्रीक से अवकाश व कार्यालय की उपस्थिति तक लाभ होगा।
ब्रिज पुराने है तो टाले नहीं
अगर मंडल में कोई ब्रिज पुराना हो गया है तो उसको रखरखाव टालना नहीं चाहिए। टालने से बाद में वह अधिक परेशानी का कारण बनेगा। इस समय ब्रिज नंबर ५४ पर रखरखाव किया जा रहा है। असल समस्या ब्लॉक नहीं मिलने पर आती है। बाद में कुछ होता है तो छोटे कर्मचारी ने काम ठीक नहीं किया कहा जाता। जबकि मेरा मानना है कि बगैर ट्रैकमैन, गैंगमैन व कीमैन के सहयोग से ट्रेन को पटरी पर दौड़ाना दूर चलाया भी नहीं जा सकता। इसलिए रेल परिवार का हर सदस्य मंडल में काम के प्रति समर्पित रहे।