रेलवे में हो रहे निजीकरण के खिलाफ अब माहोल बनने लगा है। रेलवे में संगठन के नेता अलग-अलग जगह जाकर इसके होने वाले नुकसान के बारे में रेल कर्मचारियों को बता रहे है।
रतलाम।रेलवे में हो रहे निजीकरण के खिलाफ अब माहोल बनने लगा है। रेलवे में संगठन के नेता अलग-अलग जगह जाकर इसके होने वाले नुकसान के बारे में रेल कर्मचारियों को बता रहे है। रेलवे में ही नहीं, बल्कि विभिन्न सेक्टर में सरकार निजीकरण की दिशा में बढ़ रही है। इसका विरोध सिर्फ सरकारी कर्मचारी को ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे आकर करना चाहिए। आज इसका सीधा असर कर्मचारी पर हो रहा है, लेकिन आगे चलकर यह निजीकरण समाज पर असर डालेगा। इसका उदाहरण है मुंबई में बिजली का निजीकरण होने के बाद मनमाने बिल का मिलना।
यह बात वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के पश्चिम रेलवे सहायक महामंत्री आरपी गुप्ता ने पत्रिका से कही। अवंतिका एक्सपे्रस से इंदौर से मुंबई जाते समय गुप्ता का स्टेशन पर संगठन पदाधिकारियों ने स्वागत किया। इस दौरान चर्चा में गुप्ता ने कहा कि रेलवे में चुनाव को सरकार बार बार पराजय के डर से टाल रही है। सरकार एक खास संगठन को मान्यता देना चाहती है, लेकिन उसको पता है कि वो चाहते हुए भी इस कार्य को नहीं कर पा रही है। आज नहीं तो कल संगठन में मान्यता के चुनाव को करवाना ही होगा।निजीकरण पर बोले यह बातनिजीकरण के मामले में गुप्ता ने रेलवे कर्मचारियों को भी कहा कि समाज के आमजन के बीच अपनी बात को लेकर जाए।
यह इसलिए जरूरी
यह इसलिए जरूरी है कि इस समय जब निजीकरण का विरोध हो रहा है तो आमजन को लगता है कि यह सिर्फ रेलवे का मामला है, लेकिन यह हकीकत नहीं है। समाज को बताना होगा कि जब रेलवे सहित पूरे देश में हर सरकारी कार्यालय का निजीकरण होगा तो उनके बच्चों को नौकरी कौन देगा। अगर मिलेगी भी तो वेतन कम होगा व शोषण अधिक होगा। इसलिए यह जरूरी है कि समाज स्वयं भी आगे आए व निजीकरण का विरोध करें।
इन्होंने किया स्वागत
गुप्ता पहले इंदौर, देवास व उज्जैन गए। यहां पर कर्मचारियों को निजीकरण से होने वाले जीवन के असर के बारे में बताया। इसके बाद कुछ देर के लिए रतलाम रुके। रेलवे स्टेशन पर यूनियन के मंडल रेलवे कार्यालय अध्यक्ष अशोक तिवारी, सहायक मंडल मंत्री मनोहर बारोठ व नरेंद्रङ्क्षसह सोलंकी, पूर्व मंडल अध्यक्ष मनोहर पचौरी, युवा समिति उपाध्यक्ष शशिकांत शर्मा, सुनील व्यास आदि ने स्वागत किया।