
रतलाम। पितरों के स्मरण, तर्पण और श्रद्धा का महापर्व श्राद्ध पक्ष (महालय) इस बार 15 दिन का रहेगा। शनिवार 26 सितंबर से शुरू होकर शनिवार 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस पक्ष का समापन सर्वपितृ शनेश्वरी अमावस्या पर होगा। खास बात यह है कि चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध एक ही दिन, 30 सितंबर को होने से श्राद्ध पक्ष 15 दिनों में पूर्ण होगा।
ज्योतिर्विद पं. सोमेश्वर जोशी ने बताया कि 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ महालय की शुरुआत होगी। इसके बाद प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक तिथि अनुसार पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और अन्य कर्म किए जाएंगे। शनिवार को आने वाली अमावस्या के कारण इस दिन को सर्वपितृ शनेश्वरी अमावस्या कहा जाएगा। इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध का विशेष महत्व रहेगा। साथ ही 15 दिवसीय संजा पर्व की शुरुआत भी हो जाएगी।
कब कौन-सा श्राद्ध
27 सितंबर को प्रतिपदा,
28 को द्वितीया
29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध होगा।
30 सितंबर को चतुर्थी-पंचमी श्राद्ध रहेगा।
1 अक्टूबर को षष्ठी,
2 को सप्तमी,
3 को अष्टमी
4 अक्टूबर को नवमी श्राद्ध होगा।
5 अक्टूबर को दशमी
6 को इंदिरा एकादशी,
7 को द्वादशी,
8 को त्रयोदशी
9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध रहेगा।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ श्राद्ध पक्ष पूर्ण होगा।
इन्हे भोजन कराने का विशेष महत्व
डॉ. जोशी ने बताया कि शास्त्रों में श्राद्ध कर्म के लिए कुतप काल को श्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, दान और ब्राह्मण भोजन कराने की परंपरा है। श्राद्ध में भांजे, दामाद तथा बहन-बेटी को भोजन कराने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
श्राद्ध में इन बातों का रखें ध्यान
श्राद्ध कर्म के लिए कुतप काल को श्रेष्ठ माना गया है।
पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान करें।
ब्राह्मण को घर आमंत्रित कर श्रद्धापूर्वक भोजन कराने की परंपरा है।
भोजन के बाद वस्त्र, पुस्तक और दक्षिणा देने का विधान बताया गया है।
पूजन सामग्री, पुष्प, वस्त्र और भोजन में श्वेत रंग का विशेष महत्व है।
श्राद्ध कर्म पूर्ण होने के बाद ही परिवार के सदस्य सामूहिक भोजन करें।
वाघेला गो सेवा समिति की पहल
शनिवार से श्राद्ध पक्ष शुरू हो गया। इसके साथ ही घर-घर पितरों के तर्पण, श्राद्ध और स्मरण का सिलसिला शुरू होगा। पितृपक्ष में श्रद्धालु अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करेंगे। मंदिरों और तीर्थस्थलों पर भी तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही रहेगी। 10 अक्टूबर तक मनाए जाने वाले श्राद्ध पक्ष के अन्तर्गत सनातनी परंपरा के निर्वहन हुए वाघेला गो सेवा जीव दया समिति की ओर से नगर में कौओं को भोजन कराने की विशेष व्यवस्था की गई है।
गाय रोटी वाहन पर कौओं के लिए भोजन संग्रह
समिति प्रमुख दिनेश वाघेला ने बताया कि नगर में गाय की रोटी एकत्रित करने वाले वाहनों पर एक विशेष डिब्बा रखा जाएगा। इस डिब्बे में पितृपक्ष के पूरे श्राद्ध पक्ष तक लगभग 5000 घरों से कौओं के लिए भोजन एकत्रित किया जाएगा। एकत्रित भोजन को नगर के उन स्थानों पर खिलाया जाएगा, जहां कौओं की संख्या अधिक है। वाघेला ने नगर के उन सभी परिवारों से आग्रह किया है जो इस सेवा वाहन से जुड़े हैं, वे कौओं के लिए रोटी व भोजन अलग से निकालकर विशेष डिब्बे में डालें।