आउट स्टैडिंग कार्य के लिए रतलाम डीआरएम को मिला नेशनल एक्सिलेंस अवॉर्ड
रतलाम। वैसे तो रतलाम का नमकीन अपने स्वाद के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन यह दूसरी बार है जब किसी एक व्यक्ति के बेहतर काम को विश्व स्तर पर सराहना मिल रही हो। मामला रतलाम रेल मंडल का है जिसकी वजह से वल्र्ड रिकॉर्ड बुक में रतलाम का नाम शामिल हो गया है।
पहली बार भारतीय रेलवे में बेहतर कार्य करने की वजह से पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल का नाम इसमे शामिल हुआ है। इसके लिए विश्व रिकॉर्ड पर बुक प्रकाशन करने वाली संस्था का प्रमाण पत्र महामहिम राज्यपाल कलराज मिश्र ने डीआरएम आरएन सुनकर को दिया है।
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दो वर्ष में सबसे अधिक पुरस्कार
रेलवे में दो वर्ष में सबसे अधिक पुरस्कार मंडल को ही अलग-अलग कार्य करने के लिए मिले है। इसमे ७ मार्च को एक्सिलेंट वर्क के लिए रेलमंत्री पीयूष गोयल ने पुरस्कार दिया तो इसके अलावा राजभाषा में बेहतर कार्य करने से लेकर अलग-अलग मामलों पर यह पुरस्कार मिला। अब विश्व स्तर पर भारतीय रेलवे का नाम बेहतर रुप से प्रचारित होने में रतलाम रेल मंडल द्वारा किए गए कार्य को पाया गया है। इसके चलते यह पुरस्कार मिला है।
दूसरी बार विश्व पटल पर
यह दूसरा अवसर है जब रतलाम का नाम बेहतर कार्य के लिए विश्व पटल पर आया है। इसके पूर्व 2007 में जनवरी माह में शहर के गायक मोहम्मद सलीम ने 105 घंटे 20 मिनट तक लगातार गायन करके लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में स्थान बनाया था। 2007 के बाद अब रतलाम का नाम भारतीय रेलवे में बेहतर काम करने पर डीआरएम सुनकर का आया है।
इस वजह से रतलाम बन रहा मॉडल
यहां पर करीब 50 से 75 वर्ष तक के उम्र खो चुके रेलवे ब्रिज पर गडर डालकर उनकी उम्र बढ़ाई गई। अगर यह कार्य नहीं होता तो रेलवे को अरबों रुपए का व्यय करके नए ब्रिज बनाने पड़ते, लेकिन इंजीनियरिंग विभाग में लंबे समय तक काम कर चुके डीआरएम सुनकर ने नया प्रयोग करते हुए पूर्व के ब्रिज पर नई गडर डाली। इससे उनकी उम्र बढ़ गई। इसके अलावा अनेक इस प्रकार के कार्य यात्री सुविधा के लिए हुए जो पूर्व में नहीं हुए थे। इससे ही भारतीय रेलवे में रतलाम मंडल का नाम विश्व स्तर पर चमका। इसके बाद ही यह पुरस्कार मिला है।