
रतलाम। क्लास में शिक्षक की जगह अचानक कलेक्टर बच्चों के बीच बेंच पर बैठे तो माहौल पढ़ाई का अंदाज ही बदल गया। शनिवार को कलेक्टर अजय कटेसरिया ने नामली के सांदीपनि विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ बैठकर एग्रीकल्चर क्लास ली। उन्होंने बच्चों की किताबें देखीं, पढ़ाई के बारे में पूछा और फिर सवालों का सिलसिला शुरू किया। सवाल किताबी कम और बच्चों के आसपास की प्रकृति, पेड़-पौधों व लकडिय़ों से जुड़े ज्यादा थे।
कलेक्टर ने विद्यार्थियों से वर्तमान में चल रहे पाठ और अब तक पढ़ाए गए विषयों की जानकारी ली। पुस्तक में फूलों के नाम के अंतर्गत ट्यूबर रोज का उल्लेख देखकर उन्होंने बच्चों से इसका हिंदी नाम पूछा। जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने बताया कि ट्यूबर रोज को हिंदी में रजनीगंधा कहते हैं। इसके बाद चर्चा पेड़-पौधों और लकडिय़ों तक पहुंची।
कलेक्टर ने कहा बच्चों को किताबों तक सीमित न रखें
कलेक्टर ने सागौन, साल और सेमल जैसे वृक्षों की विशेषताओं के बारे में बताया और बच्चों से भी सवाल किए। उन्होंने पूछा कि ऐसी कौन-सी लकड़ी है, जो पानी में खराब नहीं होती। बच्चे जवाब नहीं दे पाए तो उन्होंने बताया कि जामुन की लकड़ी पानी में खराब नहीं होती, हालांकि यह अपेक्षाकृत कमजोर होती है। कलेक्टर ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को किताबों तक सीमित न रखते हुए उनके आसपास मौजूद पेड़-पौधों, खेती और प्राकृतिक संसाधनों की जानकारी भी दी जाए। इससे विद्यार्थी पढ़ाई को अपने आसपास की जिंदगी से जोडकऱ समझ सकेंगे।
पुराने भवन की छत से टपक रहा पानी, तत्काल मरम्मत के निर्देश
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत कलेक्टर ने सांदीपनि विद्यालय और अनुसूचित जाति बालक सीनियर छात्रावास का निरीक्षण भी किया। विद्यालय वर्तमान में पुराने भवन में संचालित हो रहा है। नवीन भवन के निर्माण को लेकर अधिकारियों से जानकारी लेते हुए उन्होंने आवश्यक फॉलोअप कर निर्माण जल्द कराने के निर्देश दिए। पुराने भवन की छत से पानी टपकने की समस्या सामने आने पर कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल छत की मरम्मत कराने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर बृजेंद्र रावत सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
कलेक्टर ने छोटे छात्रावासों की स्थिति की भी जानकारी ली
छात्रावास के निरीक्षण में कलेक्टर ने छोटे छात्रावासों की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने ऐसे छोटे छात्रावास, जहां विद्यार्थियों की संख्या कम है, उन्हें बड़े छात्रावास के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव तैयार कर भेजने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि बड़े छात्रावासों में अधिक विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं और अध्ययन का बेहतर वातावरण मिल सकेगा। साथ ही उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग हो सकेगा।
किताब से बाहर की पढ़ाई पर जोर
कलेक्टर का बच्चों के साथ संवाद सिर्फ सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने पेड़-पौधों, फूलों और लकडिय़ों की जानकारी देकर बच्चों को आसपास की प्रकृति से जोडऩे का प्रयास किया। शिक्षकों को भी निर्देश दिए कि कृषि और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा व्यवहारिक ज्ञान नियमित पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाए।