
Adhik Maas 2026 :अधिकमास यानी अतिरिक्त मास को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। इस साल अधिमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान किए गए पूजा-पाठ, दान और अच्छे कर्मों का कई गुना फल मिलता है। खासकर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए यह समय बहुत शुभ माना जाता है। गरुड़ पुराण और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि इस पूरे महीने सिर्फ एक सरल नियम को रोज अपनाया जाए, तो घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
धर्म ग्रंथों के अनुसार अधिकमास में रोज सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। इसके साथ जरूरतमंद लोगों को दान देना बेहद शुभ माना गया है। कहा जाता है कि दान करने से न केवल पितरों का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि घर की आर्थिक परेशानियां भी धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
इसी संदर्भ में गरुड़ पुराण में ऐसी कई बातें बताई गई हैं, जिनका संबंध मृत्यु के बाद व्यक्ति की वस्तुओं से जुड़ा है। माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से मृत आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद कुछ समय तक आत्मा अपने परिवार, घर और इस्तेमाल की चीजों से जुड़ी रहती है। ऐसे में यदि परिवार के लोग उनकी वस्तुओं को मोह या लालच के कारण अपने पास रखते हैं, तो आत्मा का सांसारिक बंधन मजबूत बना रहता है। इससे आत्मा को आगे की यात्रा में बाधा आ सकती है।
धार्मिक मान्यताओं में इसे पितृ दोष से भी जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि मृत व्यक्ति की वस्तुओं को स्वार्थवश संभालकर रखना पूर्वजों की नाराजगी का कारण बन सकता है। हालांकि ये पूरी तरह आस्था और परंपराओं पर आधारित बातें हैं।
गरुड़ पुराण में कहा गया है कि मृत व्यक्ति के कपड़े जरूरतमंदों को दान कर देने चाहिए। ऐसा करने से आत्मा का मोह कम होता है और उसे शांति मिलने में मदद मिलती है। साथ ही दान का पुण्य परिवार को भी मिलता है।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक गहनों से व्यक्ति का भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा होता है। इसलिए उन्हें संभालकर रखा जा सकता है, लेकिन पहनने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे आत्मा का लगाव बना रह सकता है।
कंघी, घड़ी, चश्मा, बिस्तर या अन्य निजी वस्तुएं भी जरूरतमंदों को दान कर देना बेहतर माना गया है। इससे परिवार के लोग भी मानसिक रूप से आगे बढ़ पाते हैं और पुराने दुख से बाहर निकलने में मदद मिलती है।
धार्मिक ग्रंथों में अधिमास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना बताया गया है। इस दौरान अन्न दान, वस्त्र दान, गौ सेवा और गरीबों की मदद करना बेहद शुभ माना जाता है। कई लोग इस महीने में रोज गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं।
मान्यता है कि अधिमास में किया गया छोटा सा पुण्य कार्य भी कई गुना फल देता है। इसलिए इस पूरे महीने घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना, जरूरतमंदों की सहायता करना और बड़ों का सम्मान करना बेहद लाभकारी माना गया है।
गरुड़ पुराण में बताई गई बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाता। लेकिन भारतीय संस्कृति में दान, त्याग और पूर्वजों के सम्मान की भावना को हमेशा महत्वपूर्ण माना गया है। यही वजह है कि आज भी लोग इन नियमों को श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनाते हैं।.