धर्म और अध्यात्म

Adhik Maas 33 Vastu Daan: अधिकमास में 33 वस्तुओं का दान क्यों किया जाता है, जानें क्या है इसके पीछे की वजह

Adhik Maas, Purushottam Maas: पुरुषोत्तम मास में 33 वस्तुओं के दान की परंपरा को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। जानिए अधिकमास का महत्व, 33 संख्या से जुड़ी मान्यताएं और इस दौरान क्या दान किया जाता है।
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May 31, 2026
Purushottam Maas, Malmas Daan, Purushottam Maas Rules
Adhik Maas 2026: अधिकमास में किन वस्तुओं का दान किया जाता है (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Adhik Maas 33 Vastu Daan: हिंदू पंचांग में अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) या मलमास भी कहा जाता है, विशेष धार्मिक महत्व रखता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में पूजा-पाठ, दान और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।

33 वस्तुओं के दान का धार्मिक महत्व

ज्योतिर्विद राजेंद्र मुंजाल ने बताया कि ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सूर्य वर्ष (लगभग 365 दिन) और चंद्र वर्ष (लगभग 354 दिन) के बीच हर साल 11 दिनों का अंतर आता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे अधिकमास कहते हैं।

शास्त्रों का मत: चूंकि इस महीने का कोई स्वामी ग्रह नहीं था, इसलिए स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम 'पुरुषोत्तम' दिया। धार्मिक ग्रंथों में माना गया है कि इस दौरान किए गए जप, तप और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में हजारों गुना अधिक मिल सकता है।

धार्मिक मान्यताओं में 33 कोटि देवताओं का उल्लेख मिलता है, जिसमें कोटि का अर्थ कई विद्वान प्रकार भी बताते हैं। ऐसी मान्यता है कि मलमास के दौरान 33 की संख्या में विशिष्ट वस्तुओं का दान करने से ब्रह्मांड की इन सभी 33 दिव्य शक्तियों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो सकता है। शास्त्रों में माना जाता है कि यह दान जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार करता है।

33 वस्तुओं के दान की मान्यता क्या है

अगर आप भी इस महायोग का लाभ उठाना चाहते हैं, तो अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार नीचे दी गई सामग्रियों में से किन्हीं भी चीजों को 33 की संख्या में जरूरतमंदों या सुयोग्य ब्राह्मणों को दान कर सकते हैं:

दान की मुख्य सामग्रियांमहत्व और फल
33 दीप (मिट्टी या आटे के)जीवन से अंधकार और अज्ञानता को दूर करने के लिए।
33 फल (जैसे केले, आम या मौसमी फल)वंश वृद्धि और स्वास्थ्य लाभ के लिए।
33 लड्डू या मालपुएजीवन में मधुरता और समृद्धि लाने के लिए।
33 मुट्ठी अनाज (गेहूं, चावल, तिल या जौ)घर में अन्न के भंडार हमेशा भरे रहने के लिए।
33 वस्त्र या सिक्केआर्थिक तंगी और दरिद्रता से मुक्ति के लिए।

इस बार क्यों खास है यह महीना?

इस साल का पुरुषोत्तम मास कई मायनों में बेहद दुर्लभ संयोग लेकर आया है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस बार मलमास के दौरान कई शुभ योगों (जैसे रवि योग और अमृत सिद्धि योग) का निर्माण हो रहा है। इसके अतिरिक्त, इस पावन महीने में पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना, क्षिप्रा) में स्नान का भी विशेष महत्व है। देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही खबरों के मुताबिक, इस बार लोग न केवल व्यक्तिगत रूप से दान कर रहे हैं, बल्कि सामूहिक रूप से भूखों को भोजन कराने और अनाथालयों में जरूरत का सामान बांटने के नए रिकॉर्ड भी बना रहे हैं।

अधिकमास में क्या करें और क्या न करें

क्या करें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की आराधना करें।

'विष्णु सहस्रनाम' या 'भगवद्गीता' का पाठ अवश्य करें।

सत्संग, भजन-कीर्तन में समय बिताएं और सात्विक जीवन जिएं।

क्या न करें: इस महीने में विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन या क्रोध-अहंकार से दूरी बनाकर रखें।

शास्त्रों में साफ कहा गया है कि दान हमेशा निस्वार्थ भाव से और किसी जरूरतमंद को ही दिया जाना चाहिए, तभी उसका पूर्ण फल मिलता है। तो देर किस बात की? इस पुरुषोत्तम मास में दिल खोलकर दान करिए और अपने जीवन को खुशियों से सराबोर कीजिए।

Updated on:
31 May 2026 12:24 pm
Published on:
31 May 2026 12:24 pm