धर्म और अध्यात्म

Kedarnath Dham 2026: शुरू होने जा रही है बाबा केदार की दिव्य यात्रा, ऊखीमठ से गद्दी प्रस्थान की तिथि और पौराणिक कथा जानें   

Kedarnath Dham 2026: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ धाम की पवित्र यात्रा एक बार फिर शुरू होने जा रही है। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, और 2026 की यात्रा को लेकर उत्साह चरम पर है।

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Apr 05, 2026
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बाबा केदार कपाट खुलने की तिथि|Freepik

Kedarnath Dham 2026: बस 20 दिन का इंतजार बाकी है, जब 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे बाबा केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए उत्साहित हैं। कपाट खुलने से पहले ऊखीमठ से बाबा केदार की पवित्र गद्दी विधि-विधान के साथ रवाना होती है, जिसका धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। यह यात्रा सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि गहरी आस्था और भक्ति का अनोखा संगम है। आइए जानते हैं कपाट खुलने की तिथि, गद्दी प्रस्थान और केदारनाथ धाम से जुड़ी पौराणिक कथा का महत्व।

केदारनाथ  कपाट खुलने की तैयारी और व्यवस्थाएं

उत्तराखंड के पवित्र हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। बाबा केदार के दर्शन के लिए हर साल लाखों भक्त इस पावन यात्रा का इंतजार करते हैं। इससे पहले भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली 19 अप्रैल को ओंकारेश्वर मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रवाना होगी और विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी। उत्तराखंड के चार धामों में प्रमुख स्थान रखने वाले केदारनाथ के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की भी भव्य शुरुआत मानी जाती है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

रावल पुजारी परंपरा और नई जिम्मेदारी

केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा सदियों से दक्षिण भारत के रावल पुजारियों द्वारा निभाई जाती है। इस वर्ष टी गंगाधर लिंग को मुख्य पुजारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह परंपरा धार्मिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण करवा रहे हैं।

पौराणिक कथा: पांडव और भगवान शिव

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा महाभारत काल से जुड़ी है। पांडव अपने पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की खोज में निकले थे। लेकिन शिव उनसे नाराज होकर बैल का रूप धारण कर छिप गए। भीम ने उन्हें पहचान लिया, तभी शिव भूमि में समाने लगे और उनका कूबड़ केदारनाथ में प्रकट हुआ। यही कारण है कि यहां कूबड़ रूप में शिव की पूजा होती है।

 पंच केदार का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव के शरीर के विभिन्न अंग अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें मिलाकर पंच केदार कहा जाता है। इनमें केदारनाथ के साथ तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर शामिल हैं। वहीं शिव का मुख पशुपतिनाथ मंदिर में पूजित है।

Published on:
05 Apr 2026 08:13 pm