धर्म और अध्यात्म

Mahashivratri 2026: 300 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, भोलेनाथ खोल सकते हैं किस्मत का खजाना, जानें कौन-सी राशियां हैं भाग्यशाली

Mahashivratri 2026 Durlabh Sanyog: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे पावन पर्व माना जाता है। वैसे तो हर साल 12 शिवरात्रियां आती हैं, लेकिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि का महत्व सबसे अलग होता है।

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Feb 10, 2026
Mahashivratri Durlabh Yoga|फोटो सोर्स- Freepik

Mahashivratri 2026 Durlabh Sanyog:महाशिवरात्रि 2026 को लेकर इस बार धार्मिक और ज्योतिषीय जगत में खास चर्चा है। कहा जा रहा है कि करीब 300 साल बाद एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो भोलेनाथ की विशेष कृपा का संकेत माना जा रहा है। वैसे तो साल में 12 शिवरात्रि आती हैं, लेकिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ने वाली महाशिवरात्रि का महत्व सबसे अलग होता है। इस दिन की गई पूजा, व्रत और साधना का फल कई गुना अधिक बताया गया है। ऐसे में ज्योतिषाचार्य कुछ राशियों को इस महाशिवरात्रि पर खास तौर पर भाग्यशाली मान रहे हैं, जिनके लिए किस्मत के नए दरवाजे खुल सकते हैं।

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ग्रहों का अद्भुत संयोग

ज्योतिषाचार्य मुकेश भारद्वाज के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि पर लगभग 300 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें एक साथ 8 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। ऐसे योग बहुत कम देखने को मिलते हैं और इन्हें बेहद फलदायी माना जाता है।15 फरवरी 2026 को सूर्य, बुध और शुक्र एक साथ होकर त्रिग्रही योग बना रहे हैं। इसके साथ ही श्रवण नक्षत्र भी रहेगा, जिसे भगवान शिव का प्रिय नक्षत्र माना जाता है। इसके अलावा व्यतिपात योग, वरियान योग, ध्रुव योग और राज योग का संयोग इस दिन को और भी विशेष बना रहा है।

इन राशियों पर रहेगी शिव कृपा

  • मेष राशि: इस राशि के जातकों को धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं।
  • कन्या राशि: नए कार्यों की शुरुआत के लिए समय अनुकूल रहेगा। व्यापार और करियर में उन्नति के संकेत हैं।
  • वृश्चिक राशि: नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है।

महाशिवरात्रि की सही तिथि और समय (Maha Shivaratri 2026 date and time)

वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी को सुबह 5:32 बजे समाप्त होगी। चूंकि महाशिवरात्रि की पूजा और जागरण रात्रि में किए जाते हैं, इसलिए इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 की रात को ही मनाई जाएगी। व्रत और रात्रि पूजा के लिए यही दिन श्रेष्ठ माना गया है।

रुद्राभिषेक से मिलता है विशेष पुण्य

महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन रुद्राभिषेक करने से जीवन के कई कष्ट दूर होते हैं। दशोपचार, पंचोपचार और षोडशोपचार विधि से शिवलिंग की पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मन को शांति प्राप्त होती है।

वैवाहिक बाधाओं से मुक्ति का पर्व

जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है या वैवाहिक जीवन में समस्याएं चल रही हैं, उनके लिए महाशिवरात्रि का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धा और नियम से किया गया व्रत विवाह संबंधी अड़चनों को दूर कर सकता है और दांपत्य जीवन में मधुरता ला सकता है।

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