धर्म और अध्यात्म

Pradosh Vrat 2026: हिंदू नव वर्ष का पहला सोम प्रदोष व्रत 30 या 31 कब है? जानें सही तिथि, व्रत की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Pradosh Vrat 2026: हिंदू नव वर्ष का पहला सोम प्रदोष व्रत 30 या 31 कब है? जानें सही तिथि, व्रत की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
2 min read
Mar 24, 2026
pradosh vrat 2026, som pradosh vrat 2026, pradosh vrat kab hai,
Pradosh vrat shubh muhurat|फोटो सोर्स- Freepik

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत सनातन परंपरा का एक अत्यंत शुभ और फलदायी व्रत माना जाता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित है। हिंदू नव वर्ष का पहला सोम प्रदोष व्रत विशेष महत्व रखता है और इसे बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है। श्रद्धालु इस व्रत को रखकर सुख, समृद्धि और मनचाही सफलता की कामना करते हैं। आइए जानें 2026 में यह व्रत 29 या 30 कब पड़ेगा और इसका सही मुहूर्त क्या है।

Pradosh Vrat 2026 March Mein Kab Hai: पूजा का शुभ मुहूर्त

इस दिन प्रदोष काल में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 30 मार्च को शाम 6:38 बजे से रात 8:57 बजे तक का समय पूजा के लिए श्रेष्ठ रहेगा। इस अवधि में विधि-विधान से शिव पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत को सच्ची श्रद्धा से करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है। साथ ही, संतान सुख और पारिवारिक सुख-शांति की कामना करने वाले भी इस व्रत को रखते हैं।

Pradosh Vrat Puja Vidhi: व्रत और पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल को स्वच्छ कर भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और जल अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें।इसके बाद प्रदोष व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। अंत में आरती करें और शिव चालीसा का पाठ करें। दिन भर संयम और सात्विकता का पालन करें तथा संध्या पूजा के बाद ही व्रत का पारण करें।

Pradosh Vrat Shiv Mantra: शिव पूजन मंत्र

1. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

2. ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं,
रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्॥

3.ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।।

Updated on:
24 Mar 2026 11:46 am
Published on:
24 Mar 2026 11:46 am