धर्म और अध्यात्म

Sawan 2026 Surya Grahan: सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण और अमावस्या पर सूर्य ग्रहण, भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं?

Chandra Grahan on Sawan Purnima : शिव आराधना के सबसे पावन महीने सावन में इस बार एक दुर्लभ खगोलीय नजारा दिखने जा रहा है। पवित्र महीने के दौरान सूर्य और चंद्र ग्रहण का ऐसा संयोग बन रहा है, जिसने वैज्ञानिकों से लेकर ज्योतिषियों तक सबको उत्सुक कर दिया है।

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May 28, 2026
Sawan 2026 Surya Grahan: सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण और अमावस्या पर सूर्य ग्रहण; भारत में दृश्यता न होने से सूतक काल मान्य नहीं (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Sawan 2026 Surya Grahan: इस साल का सावन (श्रावण) का महीना सामान्य नहीं, बल्कि बेहद अलौकिक और ऐतिहासिक होने जा रहा है। देवों के देव महादेव की भक्ति के इस पावन महीने में इस बार प्रकृति और ब्रह्मांड का एक ऐसा दुर्लभ नजारा देखने को मिलेगा, जो सदियों में कभी-कभार ही घटित होता है। इस पवित्र महीने के भीतर ही सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026) और चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) दोनों का एक साथ होना ज्योतिषविदों और आध्यात्मिक गुरुओं के बीच गहरी चर्चा का विषय बन गया है। इस खगोलीय घटनाक्रम ने सावन के महत्व को कई गुना बढ़ा दिया है।

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ज्योतिषियों के अनुसार क्यों विशेष है यह समय?

ज्योतिषाचार्य पंडित अनीष व्यास बताते हैं कि दोनों ग्रहणों का एक ही पाक्षिक चक्र में आना अपने-आप में एक बेहद शक्तिशाली संयोग है। ज्योतिष और धार्मिक नजरिए से, ये समय बहुत संवेदनशील भी है और आध्यात्मिक विकास के लिए तो बेहतरीन। धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण काल में मंत्र जाप, ध्यान या शिव आराधना करने से फल हजार गुना ज्यादा मिलता है। यही वजह है कि इस बार देश भर के शिवालय और ज्योतिर्लिंगों में भक्तों ने विशेष अनुष्ठान की योजनाएं बना ली हैं – सब महादेव को प्रसन्न करने में जुटे हैं।

सावन में कब लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण

इस दुर्लभ सावन में, विज्ञान और धर्म का मेल भी खूब देखने को मिल रहा है। खगोलविदों के लिए ये अद्भुत विषय है, वहीं सनातन परंपरा में इसे आत्म-शुद्धि का समय माना जाता है।

अगस्त मे, सावन के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (12 अगस्त) को साल 2026 का दूसरा और अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। इसके ठीक 15 दिन बाद, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा (28 अगस्त) को आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। ज्योतिषीय गणना कहती है कि ये ग्रहण भारत में पूरी तरह से दिखाई नहीं देंगे, इसलिए कड़े पारंपरिक सूतक के नियम लागू नहीं होंगे। लेकिन ब्रह्मांड में जो ऊर्जा बदल रही है, उसका असर मंत्र साधना और शिव उपासना पर कम नहीं पड़ेगा।

ग्रहण काल में क्या करें शिवभक्त?

  • ग्रहण की अवधि में 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप करें – ये मन को शांत करता है और नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है।
  • ध्यान लगाएं, बाहरी दुनिया से खुद को थोड़ा काटें और भगवान शिव की साधना में लीन हो जाएँ।
  • ग्रहण के बाद दान-पुण्य का महत्व भी है – अगर किसी को अन्न, कपड़े या धन दे दें, तो कष्टों से राहत मिलेगी और पुण्य भी मिलेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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Published on:
28 May 2026 10:26 am
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