धर्म और अध्यात्म

Somvati Amavasya 2026: कब है सोमवती अमावस्या? जानें स्नान, तर्पण और दान का शुभ मुहूर्त

Amavasya 2026: क्या आप भी अमावस्या को केवल अंधेरी रात और अपशकुन से जोड़कर देखते हैं? इस जून आ रही ज्येष्ठ अमावस्या आपकी यह सोच हमेशा के लिए बदल सकती है। जानिए कैसे सोमवार के दुर्लभ संयोग में स्नान-दान करने से न सिर्फ पितरों का आशीर्वाद मिलेगा, बल्कि आपकी कुंडली के कई बड़े दोष भी हमेशा के लिए दूर हो सकते हैं।

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May 27, 2026
Somvati Amavasya 2026 : अमावस्या 2026 तर्पण और पूजा विधि (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Amavasya 2026: ज्येष्ठ मास की सोमवती अमावस्या 15 जून 2026 को पड़ रही है। इस दिन पितृ तर्पण, स्नान, दान और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार अमावस्या सोमवार को होने से इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है अक्सर लोग इसे नकारात्मकता या अंधविश्वास से जोड़ देते हैं, लेकिन असल में यह दिन आत्मनिरीक्षण, मानसिक शांति और अपने पूर्वजों (पितरों) का आभार जताने का महापर्व है।

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ज्येष्ठ (सोमवती) अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Somvati Amavasya 2026 Date and Muhurat)

अगर आप भी इस दिन व्रत, दान या पितृ तर्पण करना चाहते हैं, तो नोट कर लीजिए 14 और 15 जून के ये बेहद जरूरी समय

अमावस्या तिथि की शुरुआत: 14 जून 2026 को दोपहर 12:20 बजे से
अमावस्या तिथि की समाप्ति: 15 जून 2026 को सुबह 08:24 बजे तक
सूर्योदय (15 जून): सुबह 05:45 बजे
सूर्यास्त (15 जून): शाम 07:09 बजे

चूंकि 15 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदयातिथि के नियम के अनुसार सोमवती अमावस्या का व्रत, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य के मुख्य कार्य 15 जून को ही किए जाएंगे।

शून्यता से सृजन का प्रतीक: क्यों खास है यह रात?

अमावस्या की रात भले ही आसमान में चांद नहीं दिखता, लेकिन यह अंधेरा अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने का संदेश देता है। शास्त्रों में इसे शून्यता कहा गया है। यानी वो खालीपन जहां से एक नई और सकारात्मक शुरुआत होती है।

इस दिन हमारे पूर्वजों की आत्माएं पृथ्वी लोक के सबसे करीब होती हैं। यदि इस दिन सच्चे मन से उनका स्मरण किया जाए, तो वे तृप्त होकर अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का वरदान देती हैं।

सुबह से शाम तक: ऐसे करें महा-अनुष्ठान और पूजा विधि

अगर आप घर पर हैं या किसी पवित्र नदी के तट पर, इन स्टेप्स को फॉलो करके आप इस दिन का पूरा लाभ उठा सकते हैं:

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह सूर्योदय से पहले उठें। गंगा, यमुना या गोदावरी जैसी पवित्र नदी में डुबकी लगाएं। अगर घर पर हैं, तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें।

पितृ तर्पण और पिंडदान: सूर्योदय के बाद अंजलि में जल लेकर, उसमें काले तिल और अक्षत (चावल) मिलाकर अपने पूर्वजों को याद करते हुए तर्पण दें।

मौन व्रत का महत्व: इस दिन कुछ समय के लिए मौन (शांत) रहने का प्रयास करें। यह आपके दिमाग को शांत और अंतरात्मा को मजबूत करता है।

महा दान (Charity): दोपहर के समय जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को भोजन, काले तिल, कपड़े या क्षमता अनुसार धन का दान करें। सनातन परंपरा में माना जाता है कि इस दिन किया गया दान आपके पुराने कर्मों के कर्ज को मिटा सकता है।

शाम का दीपदान: शाम को सूर्यास्त के बाद अपने घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है।

अंधविश्वास से बचें, अध्यात्म को चुनें

कई लोग मानते हैं कि अमावस्या के दिन नए काम नहीं करने चाहिए क्योंकि यह अशुभ दिन है। लेकिन सच इसके ठीक उलट है। यह दिन किसी बाहरी काम के लिए भले ही रोक दिया जाता हो, ताकि आप अपना पूरा समय अपनी आत्मा की सफाई, परिवार की खुशहाली और ध्यान में लगा सकें।

तो इस 15 जून को अंधविश्वास के डर को छोड़िए और सोमवार के इस महासंयोग में डुबकी लगाकर अपने जीवन में सकारात्मकता का नया सवेरा लेकर आइए!

नोट: 15 जून की इस सोमवती अमावस्या के ठीक बाद, अगली अमावस्या अगले महीने 14 जुलाई 2026, दिन मंगलवार को पड़ेगी।

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Published on:
27 May 2026 03:54 pm
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