धर्म और अध्यात्म

Yogini Ekadashi Date 2026: निर्जला एकादशी के बाद आती है योगिनी एकादशी, जानें इसका धार्मिक महत्व

Yogini Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी के बाद आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत पापों से मुक्ति, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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Jun 18, 2026
Yogini Ekadashi 2026 Date and Time
Yogini Ekadashi Date 2026 : योगिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त 2026 (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Yogini Ekadashi Date 2026: हिंदू सनातन धर्म में एकादशी व्रत का अपना अलग ही महत्व है। 25 जून 2026 को साल की सबसे कठिन मानी जाने वाली निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2026) का व्रत किया जाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस कठिन तपस्या के ठीक बाद कौन सी पुण्यदायी एकादशी तिथि आ रही है? जिसके बिना निर्जला एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है।

योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi)

अगर आप पंचांग देखें तो निर्जला एकादशी के बाद अगली एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। ये एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आती है और अपने नाम के मुताबिक मन, शरीर और आत्मा को एक खास तरह की शांति और जुड़ाव महसूस कराती है। अगर आपने निर्जला एकादशी का व्रत रखा है, तो योगिनी एकादशी आपके लिए और भी जरूरी हो जाती है। कहते हैं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे पुण्यफल की प्राप्ति होती है।

योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, योगिनी एकादशी का व्रत करने से आदमी के वो पाप भी कट जाते हैं जिनका उसे खुद भी पता नहीं होता। पद्म पुराण में लिखा है, अगर कोई मन से यह व्रत करता है तो उसे 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य मिलता है। यही नहीं, योगिनी एकादशी व्रत न केवल भीतर की शांति देता है, बल्कि सेहत और समृद्धि भी देता है।

हेमा माली और कुबेर की कथा

अलकापुरी के राजा कुबेर के सेवक, हेमा माली की। वह अपनी पत्नी के प्रेम में इतना डूब गया कि भगवान शिव के लिए फूल लाने में देर कर दी। राजा कुबेर का गुस्सा ऐसा था कि उन्होंने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। बाद में ऋषि मार्कंडेय ने सलाह दी कि योगिनी एकादशी करें। पौराणिक कथा के अनुसार योगिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से हेमा माली को श्राप से मुक्ति मिली और वह पुनः अपने दिव्य स्वरूप में लौट आया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी व्रत को त्वचा संबंधी कष्टों से राहत दिलाने वाला माना जाता है।

अब अगर एकादशी व्रतों के बारे में थोड़ा समझें

हिंदू कैलेंडर के हर महीने में दो पक्ष होते हैं, शुक्ल और कृष्ण। हर पक्ष की एकादशी को मिलाकर साल में 24 एकादशी पड़ती हैं, कभी-कभी मलमास होने पर ये 26 भी हो जाती हैं। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में निर्जला एकादशी आती है, और उसके दो हफ्ते बाद, आषाढ़ कृष्ण पक्ष में योगिनी एकादशी आती है। इस क्रम से ऐसा लगता है जैसे बहुत कठोर तपस्या के बाद भगवान खुद मन को शांति की ओर ले जाते हैं।

योगिनी एकादशी 2026 पर क्या करें?

इस साल योगिनी एकादशी पर खास संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि इस दिन अगर भगवान विष्णु और लक्ष्मी माता की संयुक्त पूजा करें तो घर में कभी सुख-समृद्धि की कमी नहीं रहती।

मुख्य बातेंविवरण और नियम
मुख्य आराध्यभगवान श्री हरि विष्णु (लक्ष्मी नारायण रूप)
पूजा का संकल्पदशमी की रात से ही तामसिक भोजन का त्याग करें और एकादशी को ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
विशेष भोगभगवान विष्णु को पीले फूल, पीले फल और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अवश्य अर्पित करें।
महामंत्र का जापॐ नमो भगवते वासुदेवाय का निरंतर मानसिक जाप करें।

क्योंकि आषाढ़ का महीना अक्सर बहुत गर्म रहता है, योगिनी एकादशी के दिन राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना या जरूरतमंदों को छाता और अन्न देना बहुत पुण्यदायी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे शुभ फलदायक माना गया है।