धार्मिक तथ्य

Blue Moon 2026: मई 2026 में बनेगा दुर्लभ ब्लू मून योग, एक महीने में दो पूर्णिमा से बढ़ेगा धार्मिक महत्व

Blue Moon 2026: मई 2026 में एक ही महीने में दो पूर्णिमा का दुर्लभ संयोग बनेगा। जानें ब्लू मून का धार्मिक महत्व, वैज्ञानिक कारण और इसका खास असर।

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May 17, 2026
Blue Moon 2026 : मई 2026 में ब्लू मून कब दिखेगा (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Blue Moon 2026: मई 2026 में आसमान में एक दुर्लभ खगोलीय संयोग देखने को मिलेगा। महीने की शुरुआत और अंत दोनों पूर्णिमा तिथि पर होंगे, जिससे ‘ब्लू मून’ का निर्माण होगा। ज्योतिष और खगोल विज्ञान के अनुसार ऐसा तब होता है, जब एक ही कैलेंडर महीने में दो पूर्णिमा पड़ती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इसे बेहद शुभ माना जाता है, जबकि विज्ञान इसे चंद्र चक्र और कैलेंडर के अंतर का परिणाम बताता है।

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क्या है ब्लू मून

यह खगोलीय घटना एक ही कैलेंडर महीने में दो पूर्णिमा आने के कारण बनती है। इसमें दूसरी पूर्णिमा के चांद को ब्लू मून कहा जाता है। दूसरी पूर्णिमा पर चंद्रमा का रंग सामान्य पूर्णिमा जैसा ही दिखता है।
पूर्णिमा पर स्नान, दान, जप, तप और भगवान विष्णु तथा चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व है। महीने की शुरुआत और अंत पूर्णिमा से होने को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ ही शुभ फल देने वाला माना जा रहा है।
पं. दामोदर प्रसाद शर्मा, ज्योतिषाचार्य

क्या वाकई नीला हो जाता है चांद? (The Science Behind It)

ब्लू मून नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या उस रात चांद का रंग नीला हो जाएगा? विज्ञान कहता है बिल्कुल नहीं। यह सिर्फ एक नाम है जो इसकी दुर्लभता (Rarity) को दर्शाता है। अंग्रेजी की मशहूर कहावत है "वन्स इन अ ब्लू मून" (Once in a Blue Moon), जिसका मतलब होता है किसी ऐसी घटना का होना जो बेहद दुर्लभ हो।

खगोलीय विज्ञान के अनुसार, चंद्रमा को अपने सभी चरणों (Phases) को पूरा करने में लगभग 29.5 दिन का समय लगता है, जबकि हमारे कैलेंडर के महीने 30 या 31 दिनों के होते हैं। यही आधा या एक दिन का अंतर हर दो से तीन साल में इकट्ठा होकर एक अतिरिक्त पूर्णिमा (13th Full Moon) का निर्माण करता है।

किस वर्ष बना योग

वर्ष/महीनाशुरूसमापन
जुलाई, 2015231 जुलाई
जनवरी, 2018231 जनवरी
जनवरी, 2020131 अक्टूबर
अगस्त, 2023130 अगस्त
दिसंबर, 2028231 दिसंबर
सितंबर, 2031130 सितंबर

विशेषज्ञों के अनुसार इससे पहले ऐसा संयोग जुलाई 2015, जनवरी 2018 तथा अगस्त 2023 में बना था, जब महीने की शुरुआत और अंत दोनों पूर्णिमा तिथि के आसपास हुए थे। ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा पर गोविंददेवजी सहित शहर के अन्य मंदिरों में विशेष झांकियां सजेंगी व कीर्तन सहित अन्य अनुष्ठान होंगे।

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Published on:
17 May 2026 06:27 pm
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