
Rewa news:एमपी के रीवा जिले में शासकीय शिक्षण संस्थाओं में ई-अटेंडेंस (e-Attendance System) के निर्देशों का पालन नहीं करने वाले लोकसेवकों के खिलाफ विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। रीवा एवं मऊगंज जिले के ऐसे लोकसेवकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए है, जिनकी ई-अटेंडेंस 50 प्रतिशत से कम है। लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश के अनुसार सभी शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को हमारे शिक्षक ऐप के माध्यम से संस्था पहुंचने के बाद कार्य शुरू करने से पहले निर्धारित समय में ई-अटेंडेंस लगानी है। ड्यूटी पूरी होने के बाद संस्था से ही वापस जाने पर भी ई-अटेंडेंस भी दर्ज करना अनिवार्य है।
कई लोकसेवकों की ई-अटेंडेंस 50 प्रतिशत से कम मिली है। इसे शासन और स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और लापरवाही मानते हुए कदाचार की श्रेणी में रखा गया गया है। संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना जवाब और अभिमत तत्काल संस्था प्रमुख के समक्ष प्रस्तुत करें। संस्था प्रमुख जवाब को अभिमत के साथ विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजेंगे। जहां से सभी अभिलेखों के साथ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में किसी मृत या सेवानिवृत्त कर्मचारी का नाम होने पर संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट करेंगे कि नाम पोर्टल से हटाने की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं की गई।
शिक्षकों की स्कूलों में उपस्थिति की जानकारी पोर्टल के जरिए उपलब्ध कराई जाती है। इसमें हर शिक्षक के प्रतिनिधि उपस्थिति होने का ब्यौरा होता है। 50 प्रतिशत से कम उपस्थिति वालों को लापरवाही के दायरे में माना गया है। रीवा में 397 और मऊगंज जिले में 80 शिक्षकों को अनुपस्थित माना गया है। चेतावनी दी गई है कि उपस्थिति कम होने का कोई ठोस जवाब नहीं देने की स्थिति में वेतन में भी कटौती होगी।
मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले शिक्षकों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। कई जिलों में विभाग ऐसे शिक्षको की सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने शासन के निर्देशों के बावजूद अब तक नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 620 शिक्षक ऐसे है, जिनकी उपस्थिति ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज नहीं हो रही है। शेष शिक्षकों में अधिकांश ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना शुरू कर दिया है, लेकिन करीब 14 प्रतिशत शिक्षक अभी भी इस व्यवस्था से बाहर है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित शिक्षक ई-अटेंडेंस क्यों नहीं लगा पा रहे हैं। इसके लिए सभी विकासखंडों से जानकारी मांगी गई है।