रीवा

संतान नहीं हुई तो 10 हजार पेड़ों को बना लिया परिवार, रीवा के दंपती की प्रेरक कहानी

Rewa tree man story- मध्यप्रदेश के रीवा जिलेके रहने वाले दीनानाथ कोल और ननकी देवी की यह भावुक कहानी, संतान न होने के दर्द को 10 हजार पेड़ों की परवरिश में बदल दिया...।

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Jun 05, 2026
Rewa tree man story
जमीन पर मुस्कुरा रहे जंगल। इनसेट में पत्नी ननकी देवी के साथ दीनानाथ कोल। (फोटो पत्रिका)

Childless Couple Planted 10000 Trees- संतान का सुख न मिलने पर लोग अक्सर नियति को दोष देते हैं, लेकिन रीवा जिले के डभौरा क्षेत्र के छोटे से गांव के 68 वर्षीय दीनानाथ कोल और 65 वर्षीय पत्नी ननकी देवी ने इस दर्द को पर्यावरण की अनमोल सेवा में बदल दिया। अपनी सूनी गोद को प्रकृति मां की गोद से जोड़ा। पेड़ों को संतान मानकर पालन-पोषण शुरू किया। एक दौर था जब मीलों सिर्फ सूखी, पथरीली और वीरान जमीन दिखती थी। इस नि:स्वार्थ दंपती के संकल्प ने बंजर वन भूमि पर हरियाली का तिलक लगा दिया। धूल और पत्थरों के बीच उन्होंने परिश्रम से बीज रोपे।

आज 105 एकड़ का विशाल भू-भाग जंगल में बदल गया। यह सिर्फ 10 हजार पेड़ नहीं हैं, बल्कि दीनानाथ के खून-पसीने से सींचे गए वे जीवंत सपने हैं जो लोगों को शुद्ध हवा और जीवनदान दे रहे हैं। क्षेत्र के निवासी जगदीश यादव बताते हैं कि दीनानाथ सुबह से शाम तक पौधों की देखभाल में लगे रहते हैं। तपती गर्मी हो या बारिश, उन्होंने कभी अपने पेड़ रूपी बच्चों की सेवा में कमी नहीं आने दी। जंगल तैयार करने में दंपती ने अपना जीवन खपा दिया, लेकिन बदले में उन्हें वह सम्मान और सहयोग नहीं मिला जिसकी उम्मीद करते रहे।

कई रोड़े भी आए

जगदीश ने बताया, पीड़ादायक बात तब हुई जब पौधों को पानी देने दीनानाथ ने कुआं खुदवाया। वन विभाग ने उसे अतिक्रमण मानकर पाट दिया। पानी न होने से बड़ी संख्या में पौधे तैयार नहीं हो पाए। बाद में कलेक्टर के निर्देश पर नलकूप मंजूर हुआ, लेकिन आज तक उसका खनन नहीं हो सका।

ऐसे हुई शुरुआत

दीनानाथ बताते हैं, 1990 की बात है। वे गांव के पास एक परिवार के यहां निमंत्रण में गए थे। वहां आम की गुठलीं कचरे में फेंक दी गई थीं। वहां से दो बोरी गुठली लाए और बंजर क्षेत्र में बोया। आम, आंवला, अमरूद, बेर सहित कई फलदार पौधे लगाए। कुछ उगे, पर नष्ट भी हो गए। लेकिन धीरे-धीरे बंजर क्षेत्र में हरियाली दिखने लगी। दीनानाथ ने बताया, मेरी संतान नहीं है। उन्होंने पेड़ों को ही संतान मान लिया।

भागीदारी निभानी होगी

पर्यावरणविद् पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी कहते हैं कि जैसे उत्पादों पर कैलोरी और एक्सपायरी डेट लिखी जाती है, वैसे ही कार्बन फुटप्रिट का उल्लेख भी होना चाहिए। इससे लोग जागरूक विकल्प चुन सकेंगे। चरम मौसमी घटनाएं चेतना रही हैं कि प्रकृति के बैंक से केवल लेते रहने की बजाय उसमें जमा भी करने की भागीदारी निभानी होगी।

Updated on:
05 Jun 2026 10:46 am
Published on:
05 Jun 2026 10:36 am