नगरीय निकायों के आय-व्यय की राज्य वित्त आयोग ने की समीक्षा, आयोग के अध्यक्ष ने लिए प्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव
रीवा. नगरीय निकायों की वित्तीय व्यवस्था की राज्य वित्त आयोग के सदस्यों ने मंगलवार को समीक्षा की। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित संभागीय समीक्षा में नगर निकायों एवं जनप्रतिनिधियों से कर, शुल्क, फीस एवं पथकर आदि के आय-व्यय पर सुझाव लिए गए। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष हिम्मत कोठारी ने की।
रीवा नगर निगम की चर्चा के दौरान महापौर और अधिकारियों में खींचतान सामने आयी। सदस्य केएम आचार्य ने पूछा, नगर निगम के बैंक खातों का संचालन किस तरह किया जा रहा है, एकाउंट में जमा राशि से कितनी आय हुई, जवाब में अधिकारी ने बताया कि 1.20 करोड़ रुपए, इस पर आचार्य ने सभी नगर निकायों को बैंकों में बड़े खातों के लिए फ्लैक्सी एकाउंट यानी एफडी बनाने का निर्देश दिया है।
इस दौरान महापौर ममता गुप्ता ने कहा, नगर निगम के अधिकारी मुझे बजट की जानकारी नहीं देते हैं। अध्यक्ष ने कहा कि दोनों लोगों को मिलकर बजट की जानकारी बनानी चाहिए, ताकि जनता की जरूरतों के हिसाब से विकास हो सके। अध्यक्ष ने बताया कि राज्य वित्त आयोग संवैधानिक आयोग है जो नगरीय व पंचायतों की मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति के लिए सुझावों के आधार पर वित्तीय व अन्य अनुशंसाएं करता है। जन प्रतिनिधि और व अधिकारी समन्वय बनाकर निकाय को सुदृढ़ बनाएं। निकायों में सीवरेज, पानी, सडक़ आदि के इंतजाम को प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे टैक्स लगाएं जिनसे परेशानी न हो व वह आसानी से भुगतान कर सकें।
31 जुलाई तक जनता से लिए जाएंगे सुझाव
संभागायुक्त महेशचन्द्र चौधरी ने कहा कि नगरीय निकाय भूमिगत नालियों, ड्रेनेज सिस्टम, सडक़, स्ट्रीट लाइट, पानी सप्लाई, स्लम बस्तियों के विकास, प्रधानमंत्री आवासए स्वच्छता आदि जानकारी राज्य वित्त आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। सदस्य केएम आचार्य ने बताया वित्त आयोग द्वारा नगरीय निकायों के संबंध में आम जनों से 31 जुलाई तक सुझाव भी आमंत्रित हैं। सदस्य सचिव मिलिंद वाइकर ने पांचवे वित्त आयोग के गठन, उद्देश्य की जानकारी दी। इस दौरान निकायों के अधिकारियों ने निकाय के संबंध में जानकारी दी। मौके पर कलेक्टर रीवा प्रीति मैथिल, सतीश सोनी, विभा पटेल सहित नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधि व
अधिकारी उपस्थित थे।
अविकसित प्लाटों पर रोक लगाई जाए
सांसद जनार्दन मिश्र ने नगरीय निकायों में अविकसित प्लाटों और अवैध कॉलोनी निर्माण पर अंकुश लगाने और अधिक टैक्स लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन भवनों में वाटर हार्वेटिंग व्यवस्था अनिवार्य की जाए। विधायक दिव्यराज सिंह, महापौर रीवा ममता गुप्ता एवं महापौर सिंगरौली प्रेमवती खैरवार ने भी अपने-अपने सुझाव दिए। जनप्रतिनिधियों ने जल सरंक्षण एवं जल संवर्धन पर ध्यान दिए जाने के कई सुझाव दिए।
सवालों का जवाब और सुझाव नहीं दे पाए सतना के अधिकारी
आयोग के अध्यक्ष ने सतना महापौर और कमिश्नर के नहीं आने की जानकारी चाही तो, जवाब में कर्मचारी ने कमिश्नर को लू लगने और महापौर ममता पांडेय को व्यस्त होना बताया। 330 करोड़ के वार्षिक बजट की जानकारी दी गई, शहर में प्रतिदिन 150 टन कचरा एकत्रित होना बताया गया। बजट अनुपात में 48 प्रतिशत ही वसूली की जानकारी दी गई। प्रजेंटेशन में वसूली लाख रुपए में थी और करोड़ में बता रहे थे, इस पर सदस्य भडक़ गए और कहा कि जब जानकारी लिखना नहीं आता तो विकास कैसे कर रहे होगे। कंपनियों से वसूली की जानकारी चाही तो नहीं होना बताया।
सिंगरौली-चित्रकूट ने बेहतर किया प्रजेंटेशन
नगरीय निकायों की समीक्षा बैठक में सिंगरौली और चित्रकूट नगर निगम के अधिकारियों ने बेहतर प्रजेंटेशन दिया। समीक्षा के दौरान बताया गया कि सिंगरौली नगर निगम को एनटीपीसी पांच करोड़ रुपए वार्षिक दे रहा है, जबकि एनसीएल 2.50 करोड़ और रिलायंस 15 लाख रुपए जमा कर रही है। चित्रकूट नगरीय अधिकारियों ने पांच करोड़ रुपए रेलवे से मुआवजा सहित अन्य जानकारियों का प्रजेंटेशन बेहतर दिखाए ओर सुझाव भी दिए।