
Iqra Hasan dharna Saharanpur : कैराना लोकसभा सांसद और समाजवादी पार्टी की नेता इकरा हसन मंगलवार को मोनू कश्यप हत्याकांड के पीड़ित परिवार के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंचीं। वहां से शुरू हुआ विवाद पुलिस हिरासत, नोकझोंक और अंत में सदर बाजार कोतवाली में धरने तक पहुंच गया। रात साढ़े नौ बजे धरना समाप्त हुआ।
शामली जिले के जसाला गांव निवासी 25 वर्षीय मोनू कश्यप की 21 अप्रैल 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव पंजोखरा स्थित रेलवे लाइन के पास मिला था, जिसमें एक पैर कटा हुआ था। परिवार ने हत्या का आरोप लगाया। पुलिस ने दो आरोपियों शुभम और सचिन कुमार को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने बताया कि वे मोनू की प्रेमिका से बात न कराने की नाराजगी में उसे पार्टी के बहाने बुलाकर शराब पिलाया और ट्रेन के आगे धक्का दे दिया।
परिवार का आरोप है कि अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं और जांच निष्पक्ष नहीं हो रही। मोनू की मां विमलेश देवी लगातार न्याय की गुहार लगा रही थीं।
मंगलवार को इकरा हसन मोनू की मां और परिजनों को साथ लेकर सहारनपुर रेंज डीआईजी अभिषेक सिंह से मिलने पहुंचीं। सांसद का आरोप है कि डीआईजी ने पीड़िता की बात ठीक से नहीं सुनी, बीच में उठकर चले गए और कुछ ऐसा कहा कि मां रोती हुई बाहर निकल आईं। इकरा हसन ने डीआईजी के व्यवहार पर नाराजगी जताई।
कार्यालय के बाहर सांसद के समर्थकों ने सड़क पर जाम लगा दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ। पुलिस ने यातायात सुधारने के नाम पर इकरा हसन को महिला थाने में करीब 10 मिनट तक हिरासत में रखा, फिर छोड़ दिया।
जब सांसद जाने लगीं तो सूचना मिली कि उनके कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। इस पर वे वापस लौटीं और सदर बाजार कोतवाली में धरने पर बैठ गईं।
धरने के दौरान इकरा हसन ने एसपी सिटी व्योम बिंदल से तीखी बहस की। उन्होंने कहा, मुझे गोली मार दो या फांसी पर चढ़ा दो, लेकिन न्याय तो दो। पूर्व सांसद हाजी फजलुर रहमान और अन्य सपा नेता भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पूर्व राज्यमंत्री मांगेराम कश्यप समेत चार कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
एसपी सिटी व्योम बिंदल ने कहा कि यातायात बाधित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। डीआईजी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सांसद की पूरी बात सुनी गई और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई चल रही है। रात करीब 9:30 बजे धरना समाप्त हुआ।