
Uttar Pradesh Politics : उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भले ही कई मुद्दों पर साथ नजर आती हों, लेकिन दोनों दलों के बीच सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा। इसी बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के परिवार से जुड़ी एक चर्चा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद जल्द ही समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि अभी तक न तो समाजवादी पार्टी और न ही शायान मसूद की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान आया है।
हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में शायान मसूद कांग्रेस उम्मीदवार और अपने ससुर इमरान मसूद के चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे थे। उन्होंने जिले भर में जनसभाएं, नुक्कड़ बैठकें और चुनावी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। ऐसे में उनके संभावित राजनीतिक बदलाव की चर्चा ने सभी का ध्यान खींच लिया है।
शायान मसूद का संबंध सहारनपुर के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से है। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ मुस्लिम नेता रहे काजी रशीद मसूद के पौत्र हैं। उनके पिता शाजान मसूद भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। इसके अलावा शायान, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद हैं और पहले समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि शायान मसूद की समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत अंतिम चरण में है। माना जा रहा है कि यदि सब कुछ तय रहा तो आने वाले दिनों में वे औपचारिक रूप से सपा की सदस्यता ले सकते हैं। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, कुछ समय पहले इमरान मसूद ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा। इसके बाद से परिवार के भीतर राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग चर्चाएं शुरू हुईं। इसी घटनाक्रम के बाद शायान के नए राजनीतिक विकल्प तलाशने की अटकलें तेज हो गईं। हालांकि इन दावों पर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यदि शायान मसूद समाजवादी पार्टी में शामिल होते हैं तो इसका असर सिर्फ सहारनपुर तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक, स्थानीय संगठन और विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह सियासी चर्चा जल्द हकीकत में बदलती है या फिर यह केवल राजनीतिक अटकल साबित होती है। आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।