Sambhal News: यूपी के संभल में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने महंगाई और NEET परीक्षा में धांधली के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई।
SP Protest Sambhal:संभल जनपद के बहजोई स्थित जिला कलेक्ट्रेट में उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने महंगाई और नीट परीक्षा में धांधली का मुद्दा उठाकर जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे सपा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए डीएम कार्यालय परिसर में हंगामा किया। प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी देर तक गर्म रहा और प्रशासनिक परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही।
प्रदर्शनकारी जब जिलाधिकारी कार्यालय की ओर ज्ञापन सौंपने पहुंचे तो गेट पर तैनात पुलिस बल ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थिति बिगड़ते देख अपर जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचे और हस्तक्षेप किया। इसके बाद जिलाधिकारी ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करके माहौल को शांत कराया। इसके बाद कार्यकर्ताओं को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल से मिलने की अनुमति दी गई। बातचीत के बाद सपा प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा और प्रदर्शन को समाप्त किया गया। सपा प्रतिनिधिमंडल, जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वापस लौट गया।
इस प्रदर्शन में कई प्रमुख नेता और जनप्रतिनिधि शामिल रहे। राज्यसभा सांसद जावेद अली खान, संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क, गुन्नौर विधायक रामखिलाड़ी यादव, संभल विधायक इकबाल के पुत्र सुहैल इकबाल, पूर्व प्रत्याशी विमलेश कुमारी, पूर्व मंत्री अकीलुर्रहमान खां और जिला महासचिव कृष्णमुरारी शंखधार समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर महंगाई और परीक्षा प्रणाली को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि मई महीने में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता पर भारी बोझ पड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार ने दाम क्यों नहीं घटाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित की बजाय अपने निर्णयों को प्राथमिकता दे रही है।
प्रदर्शन के दौरान नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया गया। नेताओं ने दावा किया कि इससे करीब 22 लाख छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि परीक्षा को रद्द कर पारदर्शी तरीके से पुनः आयोजित किया जाए, ताकि छात्रों के साथ न्याय हो सके।