सतना

MP में सरकार की बड़ी तैयारी, इन जनजातियों का बदल सकता है दर्जा

MP news: इस संबंध में सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था ने जारी किए हैं।

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May 03, 2026
government preparing change the status of tribe and Caste (फोटो- फेसबुक)

MP news: मध्यप्रदेश में जनजातीय वर्गीकरण में संभावित बदलाव की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। विशेष तौर पर विन्ध्य के कोल समाज के दर्जे में बड़ा बदलाव कर उनके अधिकारों को और बढ़ाने की तैयारी है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कोल, कोरकू और मवासी जनजातियों को विशेष पिछड़ी जनजाति कोतवाल तथा (कोतवालिया) अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के लिए व्यापक सर्वे और मानवशास्त्रीय अध्ययन करने की शुरू कर दी गई है। इसे लेकर सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था ने जारी किए हैं।

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इन जिलों में होगा सर्वे

कोल जनजाति के लिए रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना, मैहर, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया कटनी, जबलपुर, डिंडौरी, नरसिंहपुर जिले में मानवशास्त्रीय अध्ययन किया जाएगा। कोरकू जनजाति के लिए खंडवा बैतूल, हरदा में सर्वे होगा। मवासी जनजाति के लिए छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल नर्मदापुरम जिले में बेस लाइन सर्वे होगा। कोतवाल को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने अलीराजपुर खंडवा, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर सहित अन्य जिले में सर्वे होगा।

यह है मामला

शासन से लंबे समय से इन समुदायों को नई श्रेणी में शामिल करने की मांग की जा रही थी। इनकी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए अध्ययन कराया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विवि अमरकंटक को सौंपी गई है। विवि के फील्ड इन्वेस्टिगेटर जिलों में जाकर जमीनी जानकारी जुटाएंगे।

मानवशास्त्रीय अध्ययन में बागरी एससी के नहीं

पूर्व में मानव शास्त्रीय अध्ययन बागरी जाति के लिए किया गया था। इस रिपोर्ट में विंध्य के बागरी को एससी वर्ग का नहीं माना गया था। इसी रिपोर्ट को लेकर विंध्य में बागरी जाति को लेकर विवाद की स्थितियां बनी हुई हैं। इसी आधार पर अब रैगांव विधायक प्रतिमा बागरी की जाति की जांच के आदेश हाईकोर्ट ने जारी किए हैं।

विशेष पिछड़ी जनजाति में में शामिल होने पर यह होगा फायदा

कोल जनजाति को विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल होने पर विशेष पैकेज और अलग योजनाएं मिलेंगी। पोषण, स्वास्थ्य और आवास में अतिरिक्त लाभमिलेगा। दूरस्थ क्षेत्रों के लिए लक्षित विकास कार्यक्रम होंगे। जबकि कोतवाल को जनजाति का दर्जा मिलने पर शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण, छात्रवृत्ति और आवासीय स्कूल की सुविधा, वन अधिकार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में मजबूती मिलेगी।

प्रदेश में अभी 3 विशेष पिछड़ी जनजातियां

बता दें कि, एमपी में तीन जनजातियों को भारत सरकार ने विशेष पिछड़ी जनजातियां (PVTG) घोषित किया है। इनके नाम है- बैगा, भारिया और सहरिया। राज्य शासन द्वारा 11 विशेष पिछड़ी जनजाति विकास अभिकरणों का गठन किया गया है। जो मंडला, बैहर (बालाघाट), डिंडौरी , पुष्पराजगढ़ (अनुपपुर) शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, (दतिया जिला सहित), श्योपुर (भिण्ड, मुरैना जिला सहित) शिवपुरी, गुना (अशोकनगर जिला सहित) तथा (तामिया जिला छिंदवाड़ा) में स्थित है। इन अभिकरणों में चिन्हांकित किए गए 2314 ग्रामों में विशेष पिछड़ी जनजाति के 5.51 लाख लोग रहते है।

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Published on:
03 May 2026 09:56 pm
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