Rajasthan Family Planning : सवाईमाधोपुर जिला अस्पताल में गर्भनिरोधक प्रत्यारोपण (इम्प्लांट) सुविधा की शुरुआत ने महिलाओं को तीन साल तक निश्चिंत जीवन जीने का भरोसा दिया है।
Rajasthan Family Planning : सवाईमाधोपुर जिले की महिलाओं के जीवन में परिवार नियोजन का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। जिला अस्पताल में गर्भनिरोधक प्रत्यारोपण (इम्प्लांट) सुविधा की शुरुआत ने महिलाओं को तीन साल तक निश्चिंत जीवन जीने का भरोसा दिया है। माचिस की तीली जितनी पतली यह स्टिक बांह में महज़ पांच मिनट में लग जाती है और बिना किसी दर्द या शल्यक्रिया के महिलाओं को अनचाहे गर्भ से बचाती है।
यह प्रत्यारोपण केवल चिकित्सा तकनीक नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए आज़ादी और स्वास्थ्य सुरक्षा का प्रतीक बन रहा है। नसबंदी का दर्द, रोज़ाना गोलियों का झंझट और निरोध (कंडोम) की चिंता सब खत्म। अब महिलाएं तीन साल तक बिना किसी अतिरिक्त उपाय के सुरक्षित रह सकती हैं। इसमें मौजूद इटोनोजेस्ट्रेल धीरे-धीरे रक्त में घुलकर गर्भधारण की संभावना को लगभग शून्य कर देता है।
जिले में तीन स्त्रीरोग विशेषज्ञों को प्रत्यारोपण लगाने और हटाने की प्रशिक्षण दी जा चुकी है। गत शुक्रवार डॉक्टर सीमा रानी मीना और डॉक्टर बीना ने दो महिलाओं को यह सुविधा दी। महिलाओं ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि अब उन्हें बार-बार गर्भधारण की चिंता नहीं रहेगी और वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दे सकेंगी।
भारत सरकार ने पहले जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में इस परियोजना की शुरुआत की थी और अब सवाईमाधोपुर भी इस सूची में शामिल हो गया है। अब तक 2500 से अधिक महिलाएं इसका लाभ ले चुकी हैं, जिनमें से 1500 से ज्यादा जयपुर की हैं। आने वाले महीनों में यह सुविधा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक भी पहुंचेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका न केवल महिलाओं को सुरक्षित रखेगा बल्कि मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करेगा। बार-बार गर्भधारण से उत्पन्न होने वाली जटिलताओं से बचाव होगा और महिलाओं को पोषण सुधारने का अवसर मिलेगा।
सवाईमाधोपुर में शुरू हुआ यह प्रत्यारोपण कार्यक्रम महिलाओं के हाथों में वह छोटी सी स्टिक है, जो आने वाले वर्षों में उनके जीवन को बड़ा बदलाव देने वाली है।
महिला अपने मासिक धर्म (पीरियड) के किसी भी समय यह प्रत्यारोपण लगवा सकती हैं, बशर्ते वह गर्भवती न हों। मासिक धर्म के पहले पाँच दिनों में लगवाने पर यह तुरंत असर दिखाता है, जबकि बाद में सात दिन तक अन्य गर्भनिरोधक उपाय अपनाने पड़ते हैं। सरकार इसे परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत मुफ्त उपलब्ध करा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका तीन साल का अंतर रखने में मदद करेगा, जिससे मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। यह विधि बार-बार गर्भधारण से उत्पन्न होने वाली जटिलताओं से बचाव करती है और महिलाओं को पोषण सुधारने का अवसर देती है। अधिकांश महिलाओं में प्रसव के कुछ महीनों बाद माहवारी शुरू हो जाती है, जिससे जल्द गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में यह प्रत्यारोपण एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित होता है।
सवाईमाधोपुर जिले में गर्भनिरोधक के रूप में इम्प्लेंट की शुरुआत की है। माचिस की तीली जितनी छोटी स्टिक तीन साल तक अनचाहे गर्भ से बचाएगी। यह मुफ्त इम्प्लांट को बांह में 5 मिनट में लगाया जा सकता है अब नसबंदी के बिना भी महिलाएं सुरक्षित रह सकेंगी। माचिस की तीली जितनी छोटी सब डर्मल कॉन्ट्रासेप्टिव इम्प्लांट स्टिक महिलाओं को 3 साल तक अनचाहे गर्भ से बचाएगी।
अनिल कुमार जैमिनी, सीएमएचओ, सवाईमाधोपुर