Ranthambore Tiger Project: रणथम्भौर में बाघों की संख्या अधिक होने के साथ ही बाघ-बाघिन तथा बाघ-मानव के बीच संघर्ष होने की आशंका भी बढ़ गई है।
सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर बाघ परियोजना में वर्तमान में बाघों के कुनबे में लगातार इजाफा होने के कारण वन विभाग एक ओर तो अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन बाघों की संख्या अधिक होने के साथ ही बाघ-बाघिन तथा बाघ-मानव के बीच संघर्ष होने की आशंका भी बढ़ गई है।
खासकर रणथम्भौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर युवा बाघ बाघिनों की पदचाप बढ़ गई है। ऐसे में यहां दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, रणथंभौर टाइगर रिजर्व में त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर बाघों की गतिविधि में बदलाव देखा जा रहा है। जहां पहले बाघिन टी-107 सुल्ताना का दबदबा था, वहीं अब बाघ टी-2511 भी इस क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दे रहा है। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे टी-2511 सिंहद्वार के पास सड़क पर आ गया। करीब ढाई घंटे तक बाघ का मूवमेंट मार्ग पर बना रहा, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और लंबी कतारें लग गईं।
वन विभाग की टीम ने स्थिति पर लगातार निगरानी रखी और सुरक्षा के मद्देनजर यातायात रोक दिया। शाम करीब साढ़े चार बजे बाघ जंगल की ओर लौट गया, जिसके बाद यातायात बहाल हुआ। वन विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र में बाघों की बढ़ती गतिविधि से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली कि बाघ सुरक्षित रूप से जंगल में लौट गया।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर बाघ टी-101, बाघिन टी-124 यानि रिद्धी और उसके शावक, बाघिन टी-107 यानि सुल्ताना और उसके शावक, बाघ टी-101 आदि का मूवमेंट रहता है।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर मिश्रदर्रा से लेकर आडा बालाजी तक मार्ग में वर्तमान में बाघ बाघिनों का मूवमेंट अधिक होने के कारण कई बार सुरक्षा के लिहाज के त्रिनेत्र गणेश मंदिर के दर्शनों के लिए आए वाले श्रद्धालुओंको रोका जा रहा है। बाद में बाघ बाघिन का मूवमेंट फिर से जंगल की ओर होने पर श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा है।
यह सही है इन दिनों रणथम्भौर में त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर बाघ बाघिनों का मूवमेंट अधिक होने केकारण आए दिन त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर बाघ बाघिन नजर आ रहे है। ऐसे में श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। विभाग की ओर से सुरक्षा के लिहाज से सावधानी बरती जा रही है। त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग भी बाघों की टेरेटरी का पार्ट है।
-मानस सिंह, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।