
Chandraprakash Dhandhan Khatu Shyam Bhakt: आस्था जब संकल्प बन जाए तो राह की हर कठिनाई छोटी लगने लगती है। ऐसा ही उदाहरण पेश कर रहे हैं मुंबई के जोगेश्वरी में रहने वाले श्याम भक्त चंद्रप्रकाश ढांढण। मूल रूप से सीकर जिले के ढांढण गांव के निवासी 35 वर्षीय चंद्रप्रकाश पिछले छह वर्षों से हर माह मुंबई से पैदल चलकर खाटू श्याम मंदिर पहुंचते हैं और शुक्ल पक्ष की एकादशी पर निशान अर्पित करते हैं।
चंद्रप्रकाश इन दिनों अपनी 71वीं पदयात्रा के दौरान उदयपुर पहुंचे, जहां उनकी भक्ति की चर्चा सुनकर लोग उन्हें देखने उमड़ पड़े। वे बताते हैं कि उनकी यह अनवरत यात्रा 25 अप्रैल 2019 को शुरू हुई थी। पहली बार करीब 1350 किलोमीटर की दूरी तय कर जब वे खाटू धाम पहुंचे, तो उन्हें ऐसी आत्मिक शांति मिली कि पदयात्रा ही उनके जीवन का उद्देश्य बन गई।
चंद्रप्रकाश एक छोटे बैग में जरूरी सामान लेकर निकलते हैं। एक यात्रा में तीन से चार जोड़ी चप्पलें घिस जाती हैं। कंधे पर ध्वज लेकर लगातार चलने से निशान पड़ गए हैं, लेकिन चेहरे पर संतोष झलकता है। पहले जहां एक यात्रा में 50 से 55 दिन लगते थे, अब वे 24 से 26 दिनों में यह दूरी पूरी कर लेते हैं। वापसी वे ट्रेन से करते हैं और अगली यात्रा की तैयारी में जुट जाते हैं। अब तक वे करीब 95 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 50 किलोमीटर चलते हैं।
भीषण गर्मी, मूसलाधार बारिश, कड़ाके की सर्दी, सुनसान रास्ते और दुर्घटनाओं का खतरा… हर परीक्षा से वे गुजरे हैं। वे कहते हैं कि जब मन में बाबा श्याम पर विश्वास हो तो डर अपने आप खत्म हो जाता है। शुरुआत में लोगों ने उन्हें पागल तक कहाए लेकिन अब वही लोग स्वागत करते हैं।
चंद्रप्रकाश बताते हैं कि यह यात्रा केवल व्यक्तिगत साधना नहींए बल्कि जनजागरण भी है। रास्ते में भजन-कीर्तन के जरिए वे श्याम कथा सुनाते हैं। कई गांवों में जहां लोग खाटू श्याम के बारे में कम जानते थे, वहां अब भक्तों की संख्या बढ़ रही है। यात्रा का खर्च भी वे कीर्तन से ही निकालते हैं और परिवार का पूरा सहयोग मिलता है। वे कहते हैं मेरे जीवन का एक ही मकसद है कि हर ग्यारस को बाबा के चरणों में निशान चढ़ा सकूं। उनकी यह अनूठी भक्ति लोगों के लिए आस्था और दृढ़ संकल्प का प्रेरक उदाहरण बन गई है।
विशेष बात यह है कि चंद्रप्रकाश की यह 71वीं पदयात्रा बाबा श्याम के सुप्रसिद्ध फाल्गुन मेले (लक्खी मेले) के शुभारंभ के साथ हो रही है। कल से शुरू हो रहे इस भव्य मेले में देश-दुनिया से लाखों भक्त पहुंचेंगे, लेकिन मुंबई से पैदल चलकर आए चंद्रप्रकाश की यह 'कठिन साधना' इस बार मेले में विशेष चर्चा का केंद्र बनी हुई है। वे फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी पर बाबा के चरणों में अपना विशेष निशान अर्पित करेंगे। "क्या आप भी इस बार फाल्गुन मेले में जा रहे हैं? कमेंट में जय श्री श्याम लिखें!"