Fake Ghee Factory Seized: सीकर जिले में नकली और घटिया उत्पादों के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई में दो अलग-अलग मामलों का खुलासा हुआ है। एक ओर रींगस क्षेत्र में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली घी बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई, वहीं दूसरी ओर कृषि मंत्री के औचक निरीक्षण में घटिया मूंगफली के बीजों का बड़ा खेल सामने आया।
रींगस/सीकर। जिले में नकली और घटिया उत्पादों के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई में दो अलग-अलग मामलों का खुलासा हुआ है। एक ओर रींगस क्षेत्र में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली घी बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई, वहीं दूसरी ओर कृषि मंत्री के औचक निरीक्षण में फंगसयुक्त और घटिया मूंगफली के बीजों का बड़ा खेल सामने आया। दोनों मामलों ने आमजन और किसानों की सेहत व आर्थिक हितों के साथ हो रहे गंभीर खिलवाड़ को उजागर कर दिया है।
रींगस कस्बे के नजदीकी गांव सरगोठ में सीकर डीएसबी ब्रांच और रींगस पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नकली घी बनाने के बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक मकान से सरस और लोटस ब्रांड के नाम पर तैयार किया जा रहा 210 किलो नकली घी बरामद किया। मामले में आरोपी कमलेश राजपूत को गिरफ्तार कर कॉपीराइट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई एडिशनल एसपी दीपक गर्ग के नेतृत्व में की गई।
पुलिस को सूचना मिली थी कि सरगोठ निवासी कमलेश राजपूत पुत्र भवानी सिंह अपने घर पर नकली स्टिकर लगाकर ब्रांडेड कंपनियों के नाम से घी बेच रहा है। इसके बाद डीएसबी ब्रांच और रींगस पुलिस ने संयुक्त रूप से दबिश दी। छापेमारी के दौरान मौके से लोटस घी के 14 भरे हुए टिन, दो पैकिंग मशीनें, लोटस के 140 खाली टिन, सरस के 2 टिन, वनस्पति के 21 टिन और दीपज्योति ब्रांड के 4 खाली टिन बरामद किए गए। इसके अलावा बड़ी संख्या में नकली कंपनी स्टिकर और पैकिंग सामग्री भी जब्त की गई।
डीएसबी ब्रांच के एएसआई महेश कुमार यादव ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पाम ऑयल और फ्लेवर का इस्तेमाल कर नकली घी तैयार करता था। बेहद कम लागत में तैयार किए गए इस नकली घी को ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बाजार में दोगुनी कीमत में बेचा जाता था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से खाटूश्यामजी, रींगस और आसपास के कस्बों में नकली घी की सप्लाई कर रहा था। इतना ही नहीं, बड़े शादी समारोहों, हाईवे पर स्थित होटलों और खाटूश्यामजी क्षेत्र में भी यह नकली घी आधी कीमत पर सप्लाई किया जाता था।
इधर, कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के औचक निरीक्षण में सीकर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक कंपनी में किसानों के साथ बड़े स्तर पर धोखाधड़ी का मामला उजागर हुआ। जांच में सामने आया कि साधारण और खाने योग्य घटिया मूंगफली को मशीनों से प्रोसेस कर प्रमाणित बीज के नाम पर ऊंचे दामों में बेचा जा रहा था। निरीक्षण के दौरान बीजों में एफ्लाटॉक्सिन नामक खतरनाक फंगस भी मिली।
अधिकारियों ने मौके से बाजरा और ग्वार सहित 31 सैंपल तथा उर्वरक के दो नमूने लेकर बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए। जांच में सामने आया कि खुले बाजार से सस्ती मूंगफली खरीदकर उसे राजस्थान एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट की आरजी-510 किस्म बताकर किसानों को चार से पांच गुना अधिक कीमत पर बेचा जा रहा था। पैकिंग गोविंदगढ़ में बिना लाइसेंस संचालित गोदाम में की जा रही थी।
कृषि मंत्री मीणा ने कहा कि नकली और दूषित बीजों के कारण राजस्थान की मूंगफली की अंतरराष्ट्रीय साख प्रभावित हुई है तथा कई देशों ने आयात पर प्रतिबंध तक लगा दिया। उन्होंने संबंधित फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार संदिग्ध नमूनों को लैब जांच के लिए भेजा गया है तथा पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। कंपनी प्रतिनिधि का कहना है कि लगातार सैम्पलों की जांच होती रहती है, जिनमें सैम्पल सही मिले थे। मंगलवार को मंत्री ने बिना किसी जांच के आरोप तय कर दिए।