नीमकाथाना निवासी सुनील कुमार यादव वर्ष 2014 में भारत-चीन सीमा पर फाल्कन ऑपरेशन के लिए तैनात थे।
नीमकाथाना.
देश की सरहदों की रक्षा में जान न्यौछावर करने वाले जवानों के परिजनों का संघर्ष भी कम नहीं है। राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना शहर में पिछले आठ दिन से चल रहा एक पिता का संघर्ष इसका जीता जागता उदाहरण है।
तीन साल पहले शहीद हुए सुनील यादव के पिता सांवलराम यादव अपने बेटे की याद में उसकी मूर्ति लगवाना चाहते हैं, लेकिन पालिका प्रशासन इसके लिए जमीन नहीं दे रही। व्यथित पिता ने जिद पकड़ ली और पिछले आठ दिन से पालिका के सामने भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लेकिन जिम्मेदार अभी भी मौन हैं।
नगर पालिका के सामने शहीद सम्मान बचाओ संघर्ष समिति द्वारा पांच मांंगों को लेकर धरना सोमवार को भी जारी रहा। सांवलराम यादव व उनके सहयोगी सुग्गाराम की सोमवार सुबह तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। सुबह चिकित्सकों की टीम ने दोनों अनशनकारियों के स्वास्थ्य की जांच की जिसमें शहीद पिता की तबीयत ज्यादा खराब मिली।
शाम को संघर्ष समिति के पदाधिकारी सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर से भी मिल कर मामले से अवगत करवाया। इस पर बाजौर ने सदस्यों को आश्वासन दिया। इस दौरान रामस्वरूप यादव, कृष्ण यादव, मालिराम, बाबुलाल, महावीर, श्रीपाल, दिलीप यादव लालचंद आदि पदाधिकारी मौजूद थे।
18 हजार फीट की दुर्गम पहाड़ी पर हुए थे शहीद
नीमकाथाना निवासी सुनील कुमार यादव वर्ष 2014 में भारत-चीन सीमा पर फाल्कन ऑपरेशन के लिए तैनात थे। 18 अक्टूबर 2014 को बॉर्डर पर 18000 हजार ऊंची दुर्गम पहाडिय़ों में माइनस 15 डिग्री तापमान में पेट्रोलिंग के दौरान मौसम खराब होने के कारण सुनील यादव के शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो गई और वे देश के लिए शहीद हो गए।
हालांकि शुरुआत में सरकार ने सुनील यादव की मौत को सामान्य माना था, जिसकी वजह से उन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिल पाया। इसके बाद सुनील यादव के पिता सांवलराम यादव ने सरकार से संघर्ष किया। नतीजा ये रहा कि शहादत के डेढ़ साल बाद सरकार ने सुनील यादव को शहीद को दर्जा दिया।