
नीमकाथाना (सीकर): हाल ही में शुरू हुआ मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) एक बार फिर विवादों में आ गया है। पांच दिन पहले प्रसूता की मौत के मामले में तीन दिन तक धरना-प्रदर्शन हुआ था। वहीं, अब सोमवार को एक गर्भवती के परिजनों ने अस्पताल में भ्रूण गायब होने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि अधिक रक्तस्राव की स्थिति में महिला को एमसीएच से जयपुर रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने बताया कि गर्भ में भ्रूण नहीं है।
इसके बाद परिजनों ने आशंका जताई कि भ्रूण एमसीएच में ही निकल गया और इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। मामले की जांच के लिए अस्पताल प्रशासन ने चार सदस्यीय समिति गठित की है। वहीं, पीड़िता के ससुर ओमप्रकाश ने उपखंड अधिकारी को शिकायत देकर जांच की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, 19 जुलाई सुबह 5.27 बजे कोटड़ा निवासी किरण को पेट दर्द और अत्यधिक रक्तस्त्राव की शिकायत के साथ एमसीएच लाया गया था। उसकी स्थिति गंभीर होने पर तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया गया और चिकित्सकीय परामर्श के बाद उसे जयपुर रेफर कर दिया गया। महिला की करीब एक महीने पुरानी सोनोग्राफी रिपोर्ट में लगभग 28 सप्ताह की गर्भावस्था के साथ भ्रूण में जन्मजात असामान्यताएं दर्ज होना बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भ्रूण का वजन करीब 669 ग्राम था। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि अस्पताल में न तो प्रसव हुआ और न ही गर्भपात। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार महिला अस्पताल में आधे घंटे से भी कम समय तक रही और इस दौरान परिजन लगातार उसके साथ मौजूद थे। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि गर्भपात अस्पताल में हुआ, रास्ते में हुआ या जयपुर पहुंचने के बाद। इसी तथ्य की पुष्टि के लिए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है।
इधर, पीड़ित महिला के पति दलिप ने आरोप लगाया कि पत्नी को सामान्य स्थिति में अस्पताल लाया गया था, लेकिन यहां रक्तस्राव बढ़ गया। जयपुर पहुंचने पर चिकित्सकों ने बताया कि गर्भ में बच्चा नहीं है। आरोप है कि बच्चा एमसीएच में ही निकल गया और इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी गई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल में न तो प्रसव हुआ और न ही गर्भपात। महिला अस्पताल में आधे घंटे से भी कम समय तक रही तथा सीसीटीवी फुटेज में परिजन लगातार उसके साथ दिखाई दे रहे हैं। गर्भपात कहां हुआ, इसकी जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई है।
-डॉ. कमल सिंह शेखावत, पीएमओ, जिला अस्पताल, नीमकाथाना
प्रसूता की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल लेबर रूम में भर्ती कर प्राथमिक उपचार शुरू किया गया और चिकित्सकीय जांच के बाद जयपुर रेफर किया गया। एक महीने पुरानी सोनोग्राफी रिपोर्ट में भ्रूण में जन्मजात असामान्यताएं दर्ज थीं। अस्पताल में न तो प्रसव हुआ और न ही गर्भपात।
-डॉ. जीएस छापोला, प्रभारी, एमसीएच, नीमकाथाना
महिला लगभग पांच-छह महीने की गर्भवती थी और उसे अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। प्राथमिक उपचार, फ्लूइड और आवश्यक दवाएं देने के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल जयपुर रेफर कर दिया गया था।
-डॉ. असराम खटाणा, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एमसीएच नीमकाथाना