
सिरोही। रेलवे की नौकरी हर साल लाखों युवाओं का सपना होती है। सीकर जिले के मालखेड़ा गांव निवासी 30 वर्षीय सत्येंद्र सैनी ने भी यही सपना देखा था। कठिन मेहनत और लगन के दम पर उसने रेलवे में सहायक लोको पायलट की नौकरी हासिल की। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जब उसकी पहली स्थायी पोस्टिंग सिरोही जिले के आबूरोड में हुई तो पूरे परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं था। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह खुशी सिर्फ एक महीने की मेहमान साबित होगी।
बुधवार को आबूरोड स्थित रेलवे डीजल शेड के पास डीएफसी लाइन पर एक दर्दनाक हादसे में सत्येंद्र की मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि मौके पर ही उसकी जान चली गई। सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आबूरोड अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
सत्येंद्र की मौत की खबर जैसे ही सीकर स्थित उसके गांव मालखेड़ा और परिवार तक पहुंची, हर कोई स्तब्ध रह गया। महज एक साल पहले सत्येंद्र की शादी हुई थी और परिवार नई जिंदगी की शुरुआत की खुशियां मना रहा था। अब वही घर गम में डूब गया है।
सत्येंद्र के पिता वर्षों से ऑटोरिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। उनकी मेहनत रंग लाई और सत्येंद्र रेलवे में सहायक लोको पायलट बन गया। परिवार को उम्मीद थी कि अब संघर्ष के दिन पीछे छूट जाएंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
सहकर्मियों के अनुसार सत्येंद्र बेहद शांत, मिलनसार और अपने काम के प्रति समर्पित युवक था। उसकी मौत की खबर सुनकर रेलवे कर्मचारियों को भी यकीन नहीं हुआ। सभी का कहना था कि उसने हाल ही में आबूरोड में अपनी जिम्मेदारी संभाली थी और पूरे उत्साह के साथ काम कर रहा था।
परिवार में सत्येंद्र के अलावा उसका छोटा भाई भारतीय नौसेना में कार्यरत है, जबकि छोटी बहन पढ़ाई कर रही है। एक बेटे को खोने का दर्द पूरे परिवार पर भारी पड़ गया है। जिस पिता ने ऑटो चलाकर बेटे को लोको पायलट बनाया था, आज उसी बेटे की अर्थी को कंधा देने की नौबत आ गई। वहीं पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।