- अंधेरे में जीवन यापन कर रहे आदिवासी, दीपक का ही सहारा
सिरोही. सरकारें विकास का चाहे जितना भी दावा करें पर पोल खुल ही जाती है। आजादी के लगभग 7० साल बीत चुके हैं लेकिन जिले में कई गांवों तक बिजली नहीं पहुंची या फिर यूं कहें कि आज भी लोग बिजली से अनजान हैं। गोयली ग्राम पंचायत की बोकी भागली ऐसा ही गांव है।
जानकारी के अनुसार वन विभाग अपनी भूमि बता रहा है और डिस्कॉम के अधिकारियों का कहना है कि विभाग लिखित में दे तो बिजली दी जा सकती है। दोनों की खींचतान में आदिवासी अंधेरे में जीवन यापन कर रहे हैं। हालांकि यहां रोशनी नहीं होने के बावजूद कई आदिवासी युवा आईआईटी तथा डॉक्टरी कर रहे हैं। कोई भी जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की आवाज नहीं सुन रहा। ग्रामीणों का कहना है कि किसी नेता और प्रधान ने कभी विद्युतीकरण के प्रयास नहीं किए। बिजोला भागली का भी यही हाल है।
गांव में है डेढ़ सौ घर
यहां पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना का लाभ भी नहीं पहुंचा है। बोकी भागली में करीब डेढ़ सौ घर आज भी दीपक से रोशन हो रहे हैं। ३० परिवारों के लोगों ने १८ अप्रेल २०१३ को डिस्कॉम में आवेदन कर ३,५१० की डिमांड राशि भी भर दी लेकिन बिजली नहीं पहुंची। ग्रामीणों ने बताया कि यहां कई वर्षोंसे आबादी बसी हुई है।
प्रधानमंत्री तक को लिखा पत्र
रामाराम गरासिया ने बताया कि बिजली की समस्या को लेकर जिला कलक्टर, मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री तक ज्ञापन भेज दिए। वहां से भी कई बार पत्र आ गए लेकिन प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीण सवाराम, भूराराम, भारताराम, कसनाराम, कानाराम, नवाराम, भीमाराम एवं रूपाराम ने बिजली के लिए डिमांड राशि भरी है।
इनका कहना है...
एक हैक्टेयर तक जमीन हो तो हम व्यवस्था कर सकते हैं, इससे ज्यादा हो तो केन्द्र सरकार को लिखना पड़ता है। बसावट के डायवर्जन के बाद व्यवस्था हो सकती है। यही चूली भागली में किया था।
- संग्रामसिंह कटियार, उपवन संरक्षक, सिरोही
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यह गांव वनक्षेत्र में है, इसकी पूरी पत्रावली ऑनलाइन कर दी है, फोरेस्ट से इसकी स्वीकृति आ जाए तो गांव को रौशन कर देंगे।
- प्रवीण खत्री, एक्सईएन, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, सिरोही