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खेल जगत में पसरा मातम, टीम इंडिया को ओलंपिक का कांस्य पदक दिलाने वाले खिलाड़ी का निधन

Former Hockey Goalkeeper Manuel Frederick Dies: अभी वूमेंस क्रिकेट टीम के वर्ल्डकप 2025 के फाइनल में पहुंचने का जश्न पूरी तरह मन भी नहीं पाया था कि भारतीय ओलंपियन के निधन से खेल जगत में मातम छा गया।

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Oct 31, 2025
मैनुअल फ्रेडरिक और श्रीजेश (फोटो- IANS)

Manuel Frederick Dies: गुरुवार को भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वूमेंस वर्ल्डकप 2025 के दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बना ली। इस जीत के बाद पूरे देश में खुशी का माहौल था लेकिन शुक्रवार की सुबह ओलंपियन की मौत की खबर से खेल जगत में मातम छा गया। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर और 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली टीम के सदस्य मैनुअल फ्रेडरिक का शुक्रवार सुबह बेंगलुरु में निधन हो गया।

फ्रेडरिक 78 साल के थे और उनकी दो बेटियां हैं। बता दें कि दुनिया से लड़कर भारत को ओलंपिक में मेडल दिलाने वाले ये दिग्गज पिछले 10 महीनों से प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे। फ्रेडरिक का जन्म 20 अक्टूबर, 1947 को कन्नूर के बरनासेरी में हुआ था। उन्होंने केरल की ओर से हॉकी खेलते हुए भारतीय टीम में जगह बनाई और आगे चलकर ओलंपिक में पदक जीता। वह केरल से ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे और बाद में पीआर श्रीजेश ने टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर अपना नाम दर्ज कराया।

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2019 में मिला था मेजर ध्यानचंद पुरस्कार

फ्रेडरिक की बेटी फ्रेशना ने कहा, "पिताजी का आज सुबह निधन हो गया। वह पिछले 10 महीनों से कैंसर से पीड़ित थे और एक साल पहले हमारी मां के निधन के बाद से भी डिप्रेशन में थे। हमने पूरी कोशिश की, लेकिन अंततः उन्हें पीलिया हो गया और उनका लीवर डैमेज हो गया, जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई।" फ्रेडरिक को 2019 में खेल और खेलों में लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए मेजर ध्यानचंद पुरस्कार मिला था।

फ्रेडरिक को उनके निडर गोलकीपिंग के लिए टाइगर के नाम से जाना जाता था। पेनल्टी स्ट्रोक को रोकने की उनकी काबिलियत के लिए उन्हें काफी सराहा गया। 1971 में भारतीय हॉकी टीम के लिए डेब्यू करने वाले इस दिग्गज ने आखिरी मुकाबला 1978 में खेला। इस दौरान 1973 वर्ल्डकप में शानदार कोलकीपिंग के लिए उन्हें सम्मानित किया गया, जहां भारत ने सिल्वर मेडल जीता। 1978 में अपना आखिरी वर्ल्डकप खेलने वाले फ्रेडरिक को दोबारा शानदार गोलकीपिंग के लिए सम्मानित किया गया, लेकिन तब भारतीय टीम मेडल के करीब भी नहीं पहुंच सकी।

Updated on:
31 Oct 2025 03:30 pm
Published on:
31 Oct 2025 02:34 pm
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