
Sri Ganganagar News: श्रीगंगानगर जिला अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) भवन में 16 वर्षीय अविवाहित किशोरी द्वारा बच्चे को जन्म देने का मामला सामने आया है। नाबालिग के मां बनने की सूचना पर महिला थाना पुलिस अस्पताल पहुंची, लेकिन समान नाम की दो प्रसूताओं के भर्ती होने से पहचान को लेकर भ्रम पैदा हो गया और पुलिस पहली बार में संबंधित किशोरी तक नहीं पहुंच सकी। अब पुलिस अस्पताल रिकॉर्ड के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, प्रसव पीड़ा होने पर परिजन 16 वर्षीय किशोरी को जिला अस्पताल के एमसीएच भवन लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसका सामान्य प्रसव कराया, जिसमें उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। अस्पताल प्रशासन ने नाबालिग के प्रसव का मामला होने के कारण नियमानुसार इसकी सूचना महिला थाना पुलिस को दी।
महिला थाना की सीआई रचना बिश्नोई ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस टीम जिला अस्पताल पहुंची। लेकिन वहां संबंधित किशोरी और उसका नवजात नहीं मिले। प्रारंभिक पड़ताल के बाद पुलिस टीम वापस लौट आई। इस बीच अस्पताल के नर्सिंग स्टॉफ ने स्पष्ट किया कि उसी समय एक ही नाम की दो गर्भवती महिलाएं अस्पताल में भर्ती हुई थीं। इनमें एक की आयु लगभग 19 वर्ष थी, जबकि दूसरी महज 16 वर्ष की किशोरी थी।
हालांकि, दोनों के पति और पिता के नाम अलग-अलग दर्ज थे। इसी समान नाम के कारण पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई और पुलिस पहली बार में सही प्रसूता तक नहीं पहुंच सकी। अस्पताल से दोबारा सूचना मिलने पर महिला थाना पुलिस फिर जांच के लिए पहुंची। लेकिन तब तक किशोरी अपने परिजनों के साथ अस्पताल से जा चुकी थी।
इसके बाद पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाने और किशोरी का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। चूंकि मामला नाबालिग से जुड़ा है, इसलिए पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि किशोरी के गर्भवती होने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और क्या इस संबंध में किसी प्रकार का कानूनी अपराध बनता है। पुलिस अस्पताल में दर्ज रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। वहीं, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए किशोरी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
नाबालिग किशोरी के प्रसव के मामले में अस्पताल में नाम की समानता के कारण एक अन्य प्रसूता और उसके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला अस्पताल के एमसीएच भवन में भर्ती दूसरी प्रसूता का नाम भी नाबालिग किशोरी के नाम से मिलता-जुलता होने के कारण वहां पुलिस कार्मिक, अस्पताल स्टॉफ और अन्य लोग बार-बार उसके वार्ड तक पहुंचकर पूछताछ करते रहे।
प्रसूता के परिजनों ने बताया कि कभी अलग-अलग लोग जानकारी लेने पहुंच जाते। बार-बार हो रही पूछताछ से परिवार असहज हो गया। उनका कहना था कि उन्हें बार-बार यह स्पष्ट करना पड़ रहा है कि भर्ती महिला बालिग है और उसका प्रसव सामान्य परिस्थितियों में हुआ है।
प्रसूता की सास ने बताया कि उनकी पुत्रवधू वयस्क है। इसके बावजूद नाम की समानता के कारण लोग लगातार सवाल पूछने पहुंच रहे हैं। एक ही समय में समान नाम की दो प्रसूताओं के भर्ती होने से भ्रम की स्थिति बनी, जिसके चलते शुरुआत में पहचान करने में कठिनाई हुई। बाद में रिकॉर्ड का मिलान करने पर दोनों मामलों की अलग-अलग पहचान स्पष्ट हो सकी।