श्री गंगानगर

राजस्थान हाईकोर्ट हुआ सख्त, श्रीगंगानगर कलक्टर, यूआईटी सचिव और तहसीलदार के खिलाफ जमानती वारंट जारी

Sri Ganganagar News: हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर जिला कलक्टर समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं। अदालत ने उन्हें 18 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।

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फाइल फोटो- पत्रिका

श्रीगंगानगर। राजस्थान हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर जिला प्रशासन के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जिला कलक्टर, यूआईटी सचिव और यूआईटी तहसीलदार के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं। अदालत ने तीनों अधिकारियों को 18 मई 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश अशोक कुमार जैन ने एसबी रिट कंटेम्प्ट पिटीशन संख्या 1059/2025 में सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता अजय कुमार की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2005 में पारित स्थगन आदेश के बावजूद जिला प्रशासन संबंधित भूमि से बेदखली की कार्रवाई कर रहा है।

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आदेश की अवहेलना का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया कि जिला कलक्टर, यूआईटी सचिव और प्रशासनिक अमला हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए कार्रवाई कर रहे हैं। याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को 30 अप्रेल 2026 के जिला कलक्टर के आदेश, 14 मई को प्रकाशित समाचार और कुछ फोटोग्राफ भी प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए गए।

स्थगन आदेश अब भी प्रभावी

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि 2 दिसंबर 2005 को पारित स्थगन आदेश अब भी प्रभावी है, क्योंकि मूल रिट याचिका अभी लंबित है। ऐसे में अदालत ने संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक मानते हुए जमानती वारंट जारी करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को ई-मेल के माध्यम से भेजने तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्रीगंगानगर के जरिए संबंधित अधिकारियों को तामील करवाने के निर्देश भी दिए हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने खेजड़ी पेड़ों की कटाई को लेकर दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया था कि किसी भी पेड़ को कानून के तहत पूर्व अनुमति के बिना नहीं काटा जाए। इसकी सूचना राज्य सरकार की ओर से गठित समिति को भी दी जाए। कोर्ट ने 1730 में खेजड़ी पेड़ों की रक्षा के लिए खेजड़ली में हुए बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि शायद अब फिर समय आ गया है कि तत्कालीन महाराजा की तरह आज के शासक भी पर्यावरण संतुलन और पेड़ों की रक्षा के लिए फरमान जारी करें। न्यायाधीश अरूण मोंगा और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि तकनीकी विकास के नाम पर प्रकृक्ति को नुकसान पहुंचाने के सवाल पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है।

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