
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सादुलशहर क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया, जहां डेरा सच्चा सौदा, सिरसा के अनुयायी और गांव तख्तहजारा सिखान निवासी काका सिंह के निधन के बाद उनकी बेटियों ने पिता की पार्थिव देह को कंधा देकर समाज को बेटा-बेटी समान होने का संदेश दिया।अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, डेरा अनुयायी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस पहल की क्षेत्रभर में चर्चा हो रही है।
परिजनों के अनुसार काका सिंह लंबे समय से डेरा सच्चा सौदा, सिरसा से जुड़े हुए थे और सामाजिक सेवा तथा मानवता के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाते थे। उनके निधन के बाद परिवार ने पारंपरिक सोच से अलग कदम उठाते हुए बेटियों को अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल किया। बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा दिया और पूरे सम्मान के साथ अंतिम यात्रा में शामिल हुईं। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
अंतिम यात्रा के दौरान 'धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा' के जयघोष गूंजते रहे। डेरा अनुयायियों और ग्रामीणों ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उपस्थित लोगों ने कहा कि बेटियों द्वारा पिता की अर्थी को कंधा देना समाज में व्याप्त बेटा-बेटी के भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश है। उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं और अंतिम संस्कार जैसे धार्मिक व पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन भी पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ कर रही हैं।
काका सिंह सादुलशहर फल-सब्जी क्रय-विक्रय सहकारी समिति के सहायक व्यवस्थापक संधुरा सिंह और अध्यापक जगदेव सिंह के पिता थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र के अनेक सामाजिक, धार्मिक और प्रबुद्ध नागरिक अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। सभी ने दिवंगत को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
इस अवसर पर प्रबुद्ध नागरिक शंकरदास स्वामी (सेवानिवृत्त ईओ), कुलदीप हुड्डा, डेरा अनुयायी हरीश बजाज, गुरमेल सिंह, रिंकू नागपाल, बबलू धींगड़ा, मानक सिंह इंसा, सर्दूल सिंह, प्रदीप जिंदल, बलवीर सिंह, भूपेंद्र सोनी, सुरजीत सिंह, लक्ष्मण सिंह सहित ब्लॉक प्रेमी सेवक, नगर प्रेमी, शाह सतनाम जी ग्रीन एस संगठन के सेवादार और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।