3 जून 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Hanumangarh: पिता की अर्थी को दिया कंधा, मुखाग्नि और मुंडन भी कराया, बेटियों ने निभाए बेटे के सभी फर्ज

हनुमानगढ़ के रावतसर में पटवारी सतपाल बिस्सू के निधन के बाद उनकी बेटियों ने मुखाग्नि, मुंडन और पिंडदान सहित सभी अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। बड़ी बेटी पहले पिता को लीवर भी दान कर चुकी है। यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

2 min read
Google source verification
Last Rites By Daughter

रावतसर। पिता के लिए परंपरा निभाती पुत्री।

हनुमानगढ़। जिले के रावतसर क्षेत्र में बेटियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। मामला तब चर्चा में आया जब बेटियों ने पिता को मुखाग्नि दी और मुंडन भी करवाया। रावतसर तहसील में कार्यरत पटवारी सतपाल बिस्सू का निधन हो गया था। सतपाल बिस्सू का कोई बेटा नहीं है। जब पिता को मुखाग्नि देने की बारी आयी तो उनकी बेटियां आगे आयी। पिता के निधन के बाद उनकी बेटियों ने साहस, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। बेटियों ने पिता के अंतिम समय से लेकर उनके अंतिम संस्कार तक हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया और परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रहीं।

उन्होंने साबित कर दिया कि बेटियां भी, बेटे के हक में आने वाली सारी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकती हैं। सतपाल बिस्सू की बेटियों के इस कार्य ने पूरे क्षेत्र में चर्चा फैला दी। जिसके बाद क्षेत्र में उनकी सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि बदलते समय में बेटियां हर क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा रही हैं और समाज में नई सोच को मजबूत कर रही हैं।

हनुमानगढ़ के सतपाल बिस्सू की तीन बेटियां हैं, सनाया बिस्सू (19), समारा बिस्सू (15) एवं सत्याक्षी बिस्सू (7)। पिता के निधन के बाद बड़ी बेटी सनाया बिस्सू ने सामाजिक परंपराओं से ऊपर उठकर अपने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। वहीं दूसरी बेटी समारा बिस्सू ने हरिद्वार पहुंचकर मुंडन करवाया तथा पिंडदान सहित अन्य धार्मिक रस्मों को पूर्ण कर पिता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन किया।

बेटी कर चुकी लीवर दान

सनाया बिस्सू का अपने पिता के प्रति समर्पण इससे पहले भी देखने को मिला था। पिता का जीवन बचाने के प्रयास में वह अपना लीवर दान कर चुकी थी। यह त्याग और समर्पण पिता-पुत्री के अटूट रिश्ते का भावुक उदाहरण है। बेटियों द्वारा निभाए गए इन कर्तव्यों की पूरे क्षेत्र में चर्चा है। लोग इसे बदलते समाज की सकारात्मक सोच और नारी शक्ति के सशक्त स्वरूप के रूप में देख रहे हैं। क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों का कहना है कि बेटियों ने साबित कर दिया है कि वे हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और साहस के साथ निभाने में सक्षम हैं। उनका यह उदाहरण नारी सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल बनकर उभरा है।